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Death toll in Maharashtra’s Nanded hospital increases to 35 महाराष्ट्र के नांदेड़ अस्पताल में मौत का आंकड़ा बढ़कर हुआ 35. महाराष्ट्र के नांदेड़ में डॉ. शंकरराव चव्हाण सरकारी अस्पताल में चार और मरीजों की मौत का मामला सामने आया है। इससे मरने वालों की संख्या 31 से बड़कर 35 हो गई है। जिसमें 16 नवजात शामिल हैं।
मौतों पर शुरु हुई सियासत
अस्पताल से मौत की खबरें आने लगी हड़कंप मच गया। इस सरकारी अस्पताल में गूंज रही चीख-पुकारों राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंची तो अस्पताल प्रशासन की नींद भी उड़ी। अस्पताल में मौत की जांच के लिए कमेटी बनाई गई। खबर सामने आते ही सियासत शुरू हो गई थी, जो अब चरम पर पहुंच गई है। महाराष्ट्र कैबिनेट मंगलवार को बैठक में मामले पर चर्चा करेगी।
नांदेड़ के सरकारी अस्पताल में 48 घंटे में 35 लोगों की मौत के बाद शिवसेना शिंदे गुट के सांसद हेमंत पाटिल ने हॉस्पिटल के डीन के साथ दुर्व्यवहार को लेकर बीएमसी डॉक्टरों का संगठन MARD हु्आ आक्रामक।
MARD ने नांदेड़ के अस्पताल में डीन से शौचालय साफ करवाने के मामले में सांसद हेमंत पाटिल से तत्काल माफी की मांग की है। चेतावनी देते हुए कहा कि अगर माफी नहीं मांगते हैं, तो MARD बीएमसी के अस्पतालों में आन्दोलन करेगी ।
डीन से कराया टॉयलेट साफ
हिंगोली के शिवसेना शिंदे गुट के सांसद हेमंत पाटील ने नांदेड़ अस्पताल के डीन डॉ. श्यामराव वकोडे से टॉयलेट साफ करवाया। उनका अपमान किया गया है। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए हैं। इसको रोकने के लिए IMA इंडियन मेडिकल असोसिएशन के निजी और सरकारी अस्पताल के डॉक्टर्स, स्टूडेंट्स नांदेड़ में ITI से लेकर कलेक्टर ऑफिस तक मोर्चा निकलेंगे।
दिग्गज नेताओं ने स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल उठाए
कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, जयराम रमेश ने एक के बाद एक ट्वीट कर राज्य सरकार की स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल उठाए। सवाल उठे तो प्रदेश सरकार को भी जवाब देने के लिए आगे आना पड़ा। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि इस संबंध में मैने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस को जानकारी दे दी है। जल्द ही वह अस्पताल का दौरा करेंगे। वहीं अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल पर लगाए गए लापरवाही बरतने के आरोपों को खारिज कर दिया।
महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के निदेशक डॉ. दिलीप म्हैसेकर ने बताया था कि मरीज कुछ स्थानीय निजी अस्पतालों से यहां भेजे गए थे। इनमें से जान गंवाने वाले कुछ मरीज वयस्क थे, जिनकी विभिन्न कारणों से मौत हुई। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एकनाथ शिंदे सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी सरकार पर हमला बोला।
क्या कहता है अस्पताल प्रशासन?
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. श्यामराव वकोडे ने बताया, 70 से 80 किलोमीटर के दायरे में यह इकलौता ऐसा केंद्र है, इसलिए मरीज दूर-दूर से भी हमारे पास आते हैं। बीते कुछ दिनों से रोगियों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने अस्पताल पर लगे चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को नकार दिया है। कहा, ‘अस्पताल में न तो दवाईयों की कमी हुई है और न ही यहां डॉक्टरों की कमी है। नवजात बच्चों के मौत का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि ये सभी बच्चे 0-3 तीन दिन के थे और उनका वजन भी बहुत कम था। मरीज पड़ोसी जिले हिंगोली, परभणी और वाशिम से आए हैं, वहीं कुछ तेलंगाना के भी मरीज यहां हैं।
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