Arpit Pandey
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Gwalior Politics: चुनावी साल में मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के नेता तो एक दूसरे खिलाफ लगातार हमला बोल ही रहे हैं। लेकिन दोनों पार्टियों में भी सियासी घमासान चल रहा है। ग्वालियर चंबल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और बीजेपी सांसद केपी यादव एक बार फिर आमने-सामने हैं। अब सिंधिया समर्थक इमरती देवी ने केपी यादव को नसीहत दी है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक माने जाने वाली पूर्व मंत्री इमरती देवी ने केपी यादव को नसीहत देते हुए कहा कि ‘केपी यादव चांद पर धूल फेकेंगे तो वहां तक पहुंचेगी नहीं, सिंधिया जी को कोई टारगेट नहीं कर सकता है। केपी यादव महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) के कार्यकर्ता थे। उन्होंने पार्टी बदली, वह बीजेपी में आ गए और जनता ने उन्हें जिता दिया। लेकिन जिस नेता से वह राजनीति सीखे उसके खिलाफ बोलना गलत बात है।’
इमरती देवी ने कहा कि ‘सबकुछ जनता के हाथ में होता है। अगर जनता बोले तो ठीक है, क्योंकि जनता कब किसको हरा दे कब किसको जिता दे। यह पता नहीं होता। इसलिए जनता ही भगवान है। जनता ही सर्वोपरि है। ऐसे में केपी यादव को अपने नेता के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए।’
दरअसल, पूरा मामला शिवपुरी जिले में आयोजित एक बैठक से जुड़ा हुआ है। यहां यादव समाज का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था। लेकिन इस आयोजन में स्थानीय सांसद केपी यादव को नहीं बुलाया गया था। जिसको लेकर उन्होंने सिंधिया और उनके समर्थकों से नाराजगी जाहिर की थी। यही से मामला गर्मा गया था।
वहीं जब इस मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक और कट्टर समर्थक कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ‘यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, लेकिन यह जरूर स्पष्ट है कि हमारी पार्टी में कोई अनबन नहीं चल रही है। हमारे यहां संगठन और विचारधारा महत्वपूर्ण है। जो भी यह अफवाह फैला रहे हैं, वह कांग्रेसी लोग कर रहे हैं।’
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