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बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में महाघोटाला : 10 साल से जिस कॉलेज से पढ़कर छात्र बन रहे थे टीचर, जमीन पर वहां सिर्फ फसल लहरा रही!

नियमों को ताक पर रखकर लगातार सिर्फ कागजों पर निरीक्षण दिखाकर फर्जी कॉलेजों को सालों से मान्यता दी जाती रही. फर्जी कॉलेजों के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को लगातार सूचनायें दी गई लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया. (विपिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी (बीयू) से मान्यता प्राप्त फर्जी महाविद्यालय (कागजों में संचालित) द्वारा बीएड-बीएससी बीएड की डिग्रियां बांटने का गंभीर मामला सामने आया है. बिना वेरिफिकेशन के ऐसे कॉलेजों को बी-एड, डी-एड की पढ़ाई कराने की मान्यता दे दी गई. यानी प्रोफाइल को अप्रूव कर दिया जबकि ऐसे कॉलेज ना तो जरूरी नॉर्म्स का पालन कर रही थी, और कई कॉलेज तो सिर्फ कागजों पर हैं जमीन पर है ही नहीं .

दरअसल, नियम कहता है कि हर साल बीएड, डीएड कराने वाले कॉलेजों की एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले कॉलेज का वेरिफिकेशन होना चाहिए, सभी जरूरी नॉर्म्स जैसे कॉलेज की बिल्डिंग, क्लासरूम, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, होस्टल, खेल के लिए मैदान, स्टूडेंट के मुताबिक शिक्षकों की पर्याप्त संख्या हैं.

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इन सारे नियमों को ताक पर रखकर लगातार सिर्फ कागजों पर निरीक्षण दिखाकर फर्जी कॉलेजों को सालों से मान्यता दी जाती रही. फर्जी कॉलेजों के बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को लगातार सूचनायें दी गई लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया. एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया, इसके बाद कुछ कॉलेजों की संबद्धता को रोक दिया गया.

जांच हुई तो जांच में पाया गया कि कहीं एक ही खसरे पर 3 कॉलेज संचालित हो रहे हैं. कई कॉलेज तो ऐसे पाए गए जो जमीन पर कहीं हैं ही नहीं जिन्हें अब नोटिस भेजे गए हैं. बावजूद इसके बाकी कॉलेजों को एक बार फिर छोटी-मोटी कमियां बताकर, कॉलेजों से शपथ पत्र लेकर फिर से संबद्धता देने का रास्ता साफ कर दिया .

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न्यूज 24 की टीम जब ग्राउंड पर ऐसे फर्जी कॉलेजों की हड़ताल करने पहुंची तो विदिशा रोड पर ग्राम मुगलिया कोट के पास बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के मान्यता प्राप्त कालेजों में दर्ज मिलेनियम कॉलेज, बंगलामुखी कॉलेज का बोर्ड नजर आया. हम कॉलेज की बोर्ड को फॉलो करते हुए मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलो मीटर अंदर पगडंडी जैसी कच्ची सड़क पर आगे गए तो एनसीटीई की वेबसाइट में बगलामुखी कालेज के दर्ज पते प्लाट नंबर 150-1 मुगलिया कोट के मुताबिक बगलामुखी कॉलेज का गेट खेतों के बीच नजर आया जिसमें ताला लगा था, गेट के दूसरी तरफ कोई बिल्डिंग नजर नहीं आई, गार्ड ने बताया फिलहाल तो यहां कोई कॉलेज नहीं है, हां काम जरूर चल रहा है. पहले हुआ करता था बगलामुखी कालेज.

जब भोपाल के विदिशा रोड पर ग्राम मुगलिया कोट में श्री राम कॉलेज जो कि बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के दस्तावेजों के मुताबिक खसरा क्रमांक 148,149/2/1 में हैं लेकिन जमीन पर यहां खेत के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है. जबकि पिछले 10 सालों से इसी श्री राम कॉलेज से कोर्स हो रहे हैं और औसतन हर साल 100 से 150 छात्र यहां से बीएड, डीएड करके निकलकर शिक्षक बन दूसरे छात्रों का भविष्य उज्जवल कर रहे हैं.

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कागजों में चल रहे कॉलेज के खेल के बीच यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की नोटशीट में मंत्री के निर्देश पर 82 बीएड कॉलेजों की प्रोफाइल ई-प्रवेश पोर्टल पर ओके की गई. यानी कार्यपरिषद की औपचारिक मंजूरी से पहले ही कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करने का रास्ता खुल गया. एक दिन पहले जिस फैसले पर सवाल उठे, अगले दिन वही यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद 125 कॉलेजों को एफिडेविट पर सशर्त निरंतरता देने पर सहमत हो गई.

सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का तर्क है कि यूनिवर्सिटी ने एक कमेटी बनाई थी, कुछ संस्थानों की कमेटी ने अनुशंसा की है, शिकायत आई थी इसलिए हमने तय किया कि उनसे शपथ पत्र लिया जाए, उसमें अगर भिन्नता पाई गई भवन या सामाग्री में तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. अब फिर से जांच कमेटी बनाकर या तो यूनिवर्सिटी से या शासन से फिर से उनका वेरिफिकेशन करेंगे, यूनिवर्सिटी को उन कॉलेज का वेरिफिकेशन करना था इसीलिए ये गडबड़ी सामने आई है, इसलिये अब हम मार्च अप्रैल कर कार्य पूरा कर देंगे. यूनिवर्सिटी को जो देरी हुई है, वह नहीं होनी चाहिए थी.

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First published on: Jul 13, 2026 08:04 PM

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