Sunday, November 27, 2022
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Gujarat Elections 2022: गुजरात के इस गांव में 1983 के बाद से पार्टियों के प्रचार पर बैन, वोटिंग को लेकर भी हैं सख्त नियम

Gujarat Assembly Elections: गुजरात में 182 विधानसभा सीटों के लिए 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होगा। वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। 

Gujarat Assembly Elections: गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस और आप समेत कई अन्य क्षेत्रीय पार्टियां चुनाव प्रचार में जुटी हैं, लेकिन राजकोट जिले में एक ऐसा गांव हैं जहां राजनीतिक पार्टियों के चुनाव प्रचार पर रोक है।

राज समाधियाला गांव के लोगों ने राजनीतिक दलों के गांव में प्रवेश और प्रचार पर रोक लगा दी है क्योंकि उन्हें लगता है कि उम्मीदवारों को प्रचार करने की अनुमति देना क्षेत्र के लिए हानिकारक होगा। कोई भी राजनीतिक दल गांव में प्रवेश नहीं कर सकता क्योंकि उनके प्रचार करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

राजकोट से 20 किलोमीटर दूर हैं ये गांव

राजकोट से 20 किमी दूर स्थित राज समाधियाला गांव में न केवल राजनीतिक प्रचार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, बल्कि चुनाव के समय अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मतदान न करने वालों पर 51 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाता है।

ग्राम विकास समिति (वीडीसी) ने कई गांव के लोगों के लिए कई नियम बनाए हैं जिसे मानना ही पड़ता है। इनमें से किसी नियम को तोड़ने पर समिति की ओर से जुर्माना भी लगाया जाता है। जानकारी के मुताबिक, अब तक गांव के करीब 100 लोग मतदान करते हैं और जो मतदान से दूर रहता है, उस पर 51 रुपये का जुर्माना लगता है।

राज समाधियाला गांव में रहते हैं 1700 लोग

गांव के सरपंच का कहना है कि यहां करीब शत प्रतिशत मतदान हो जाता है। 1700 की आबादी वाले एक छोटे से गांव ने एक कमेटी बनाई है। एक स्थानीय ने बताया कि गांव में करीब 995 मतदाता हैं और यहां के लोग अपनी मर्जी से मतदान करते हैं। मतदान से कुछ दिन पहले समिति के सदस्य ग्रामीणों की एक बैठक बुलाते हैं और यदि कोई मतदान करने में असमर्थ होता है तो समिति को इसका कारण बताना होता है।

सरपंच ने बताया कि राजनीतिक दलों को गांव में प्रचार करने की अनुमति नहीं देने का नियम 1983 से है। यहां किसी भी पार्टी को प्रचार करने की अनुमति नहीं है। राजनीतिक दलों को भी इस विश्वास का एहसास है कि अगर वे राज समाधियाला गांव में प्रचार करेंगे तो वे उन्हें विरोध का सामना करना पड़ेगा और उन्हें चुनाव में नुकसान भी होगा।

एक स्थानीय ने कहा, “यहां हमारे गांव में उम्मीदवारों को प्रचार करने की अनुमति नहीं है, इसलिए हमारे गांव के लोग उस नेता को वोट देते हैं जो उनके लिए अच्छा लगता है।”

एक अन्य स्थानीय ने कहा कि राजनीतिक दलों को भी बैनर लगाने या पर्चे बांटने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, “यहां लोग चुनाव में अपनी मर्जी से वोट डालते हैं, लेकिन वोट देने के लिए सभी को आना पड़ता है।”

एक स्थानीय ने कहा, “पिछले 20 सालों से मैं यहां मतदान कर रहा हूं, लेकिन यहां चुनाव प्रचार प्रतिबंधित है और यहां मतदान अनिवार्य है।”

गांव में वाई-फाई से लेकर आरओ प्लांट जैसी सुविधा मौजूद

गांव में वाई-फाई के माध्यम से इंटरनेट कनेक्शन, सीसीटीवी कैमरे, पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए आरओ प्लांट जैसी लगभग हर आधुनिक सुविधा है, जिससे ग्रामीणों के लिए जीवन सुविधाजनक हो जाता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अब पड़ोस के पांच गांवों ने भी यही फैसला लिया है। बताया गया कि इस गांव में सिर्फ वोटिंग न करने को लेकर जुर्माना नहीं लगता बल्कि कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाता है।

गुजरात में दो चरणों में होगा मतदान

गुजरात में 182 विधानसभा सीटों के लिए 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होगा। वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी। राज्य लंबे समय से भाजपा का गढ़ रहा है और पार्टी ने सातवें कार्यकाल के लिए सत्ता में वापसी पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं। पीएम मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। 2017 के गुजरात चुनावों में भाजपा कुल 182 सीटों में से 99 सीटों पर जीत मिली थी।

इस बार के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) से भाजपा को कड़ी चुनावी चुनौती का सामना करना पड़ा सकता है। आम आदमी पार्टी की ओर से इसुदन गढ़वी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है।

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