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दिल्ली

भारत बंद के दौरान दिल्ली के निजी संस्थानों पर क्या होगा असर? CTI चेयरमैन ने दिया जवाब

Delhi On Bharat Band: देश में कल यानी 9 जुलाई को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर जा रहे हैं। उन्होंने भारत बंद का आह्वान किया है। जानिए इसका दिल्ली पर कितना असर पड़ेगा, क्या निजी संस्थान भी बंद रहेंगे। पढ़िए दिल्ली से दिव्या अग्रवाल की रिपोर्ट।

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Written By: News24 हिंदी Updated: Jul 8, 2025 22:31

Delhi On Bharat Band: कई मांगों को लेकर 9 जुलाई को केंद्रीय कर्मचारियों ने भारत बंद का ऐलान किया है। इसमें देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन शामिल हैं। सभी ने एक संयुक्त मंच बनाकर भारत बंद का आह्वान किया है। इस वजह से बैंकिंग, डाक सेवा, खनन, निर्माण और परिवहन जैसे सरकारी क्षेत्रों के 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे। हालांकि निजी क्षेत्रों में कोई असर नहीं होगा। यह हड़ताल केवल केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा की जाएगी।

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क्या बोले CTI चेयरमैन

चेंबरऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि भारत बंद की इस हड़ताल का दिल्ली में कोई असर नहीं होगा। 9 जुलाई को दिल्ली पूरी तरह से खुली रहेगी। दिल्ली में बंद को लेकर किसी भी संस्था या संगठन ने दिल्ली के व्यापारी संगठनों से संपर्क नहीं किया है। दिल्ली में भी 700 बाजार और 56 इंडस्ट्रियल एरिया पूरी तरह से खुले रहेंगे।

क्यों किया गया है भारत बंद का आह्वान?

कर्मचारियों ने पिछले साल केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा था। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने 10 साल से ज्यादा वार्षिक श्रम सम्मेलन नहीं कराया है। साथ ही उनके मांग पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब कर्मचारी हड़ताल करने को मजबूर हैं। केंद्रीय कर्मचारियों के भारत बंद करने के वजहें श्रम नीतियां हैं। संगठनों का मानना है कि ये नीतियां मजदूरों की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती हैं। बेरोजगारी में वृद्धि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं में कटौती। युवाओं को नौकरी देने के बजाय सेवानिवृत्त लोगों की भर्ती करना जैसी कई वजहें हैं।

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इन संस्थाओं ने किया हड़ताल का ऐलान

भारत बंद में अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), भारतीय ट्रेड यूनियनों का केंद्र (CITU), हिंद मज़दूर सभा (HMS), स्व-नियोजित महिला संघ (SEWA), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) संगठन शामिल हैं। इन्हें संयुक्त किसान मोर्चा जैसे किसान समूह, ग्रामीण कर्मचारी संघ, रेलवे, NMDC लिमिटेड और स्टील उद्योग के सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों का भी समर्थन है।

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First published on: Jul 08, 2025 09:11 PM