पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की भूमिका नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की भूमिका नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने शुक्रवार को घटनास्थल का दौरा किया और हॉस्टल परिसर सहित आसपास के इलाकों की बारीकी से पड़ताल की. पटना रेंज के आईजी के नेतृत्व में गठित इस एसआईटी ने हर उस पहलू की जांच की, जिससे छात्रा की मौत से जुड़ी कड़ियां जोड़ी जा सकें.
हॉस्टल में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस हॉस्टल में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात कही जा रही थी, वहां से पुलिस को घटना से जुड़ा एक भी ठोस फुटेज नहीं मिला. न बाहर लगे कैमरों में कोई संदिग्ध गतिविधि कैद हुई और न ही अंदर के कैमरों से कोई ऐसा सबूत मिला, जो जांच को निर्णायक दिशा दे सके. इसे लेकर अब हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है.
छात्राओं ने खाली किया हॉस्टल
घटना के बाद शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली सभी छात्राओं ने हॉस्टल खाली कर दिया है. हॉस्टल फिलहाल सुनसान पड़ा है. हालांकि, न्यूज़ 24 की टीम ने जब मौके पर जाकर पड़ताल की तो हॉस्टल के अंदर की कुछ तस्वीरें सामने आईं, जो कई सवाल खड़े करती हैं. बाहर से देखने पर हॉस्टल का कोई साइन बोर्ड तक नहीं दिखता, जिससे यह एक सामान्य आवासीय मकान प्रतीत होता है, लेकिन अंदर का नजारा बिल्कुल अलग है. भीतर एक आलीशान ड्रॉइंग रूम, सुसज्जित कमरे और पार्किंग में खड़ी महंगी गाड़ियां हॉस्टल के कथित “साधारण” स्वरूप पर सवाल खड़े करती हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्हें यही जानकारी थी कि मकान मालिक ने यह इमारत किसी को लीज पर दे रखी है. अधिकतर लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं था कि यहां गर्ल्स हॉस्टल संचालित किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इस हॉस्टल में करीब 30 छात्राएं रहती थीं. इमारत की तीन मंजिलों पर रहने के कमरे बने हुए थे, जबकि चौथी मंजिल पर कैंटीन संचालित की जा रही थी.
बताया जा रहा है कि यदि नीट की तैयारी कर रही छात्रा का यह मामला सामने नहीं आता, तो शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की गतिविधियां शायद कभी उजागर नहीं होतीं. यह हॉस्टल वर्ष 2023 से संचालित हो रहा था, लेकिन 6 जनवरी 2026 के बाद से यह लगातार सुर्खियों में है.
जहानाबाद जिले की रहने वाली थी छात्रा
मृतक छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी. वह 5 जनवरी को अपने गांव से पटना लौटी थी. अगले ही दिन, यानी 6 जनवरी को, उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे कदमकुआ स्थित प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. यहीं से पूरा मामला और अधिक पेचीदा होता चला गया. परिजनों का आरोप है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था और इसी के चलते उसकी हालत बिगड़ी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और पुलिस दोनों ने शुरुआत से ही इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया.
परिजनों का कहना है कि उन्होंने बार-बार छात्रा के साथ यौन अपराध की आशंका जताई, लेकिन न तो पुलिस ने समय पर प्राथमिकी दर्ज की और न ही प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया. उल्टे, आरोपों से इनकार किया जाता रहा. अंततः छात्रा की हालत और बिगड़ने पर परिजन उसे पटना के मेदांता हॉस्पिटल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
सामने आई पुलिस की लापरवाही
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना 6 जनवरी की होने के बावजूद इस मामले में प्राथमिकी 9 जनवरी को दर्ज की गई. इस देरी को लेकर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किए जाने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों बैकफुट पर नजर आ रहे हैं.
इस मामले को लेकर पटना से लेकर जहानाबाद तक लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. शनिवार को भी जहानाबाद में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर छात्रा को न्याय दिलाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि शुरुआत में ही पुलिस और अस्पताल ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद छात्रा की जान बचाई जा सकती थी.
एसआईटी की जांच जारी
फिलहाल, एसआईटी की जांच जारी है. पुलिस का दावा है कि हॉस्टल प्रबंधन, अस्पताल प्रशासन और अब तक की पूरी जांच प्रक्रिया की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्रा को समय पर न्याय मिल पाएगा, और क्या शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की “काली करतूतें” पूरी तरह सामने आ पाएंगी या फिर यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा.
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर छात्रा के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे. दोनों नेताओं ने परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को सिस्टम की विफलता बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही.
पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की भूमिका नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की भूमिका नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने शुक्रवार को घटनास्थल का दौरा किया और हॉस्टल परिसर सहित आसपास के इलाकों की बारीकी से पड़ताल की. पटना रेंज के आईजी के नेतृत्व में गठित इस एसआईटी ने हर उस पहलू की जांच की, जिससे छात्रा की मौत से जुड़ी कड़ियां जोड़ी जा सकें.
हॉस्टल में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि जिस हॉस्टल में दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगे होने की बात कही जा रही थी, वहां से पुलिस को घटना से जुड़ा एक भी ठोस फुटेज नहीं मिला. न बाहर लगे कैमरों में कोई संदिग्ध गतिविधि कैद हुई और न ही अंदर के कैमरों से कोई ऐसा सबूत मिला, जो जांच को निर्णायक दिशा दे सके. इसे लेकर अब हॉस्टल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है.
छात्राओं ने खाली किया हॉस्टल
घटना के बाद शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली सभी छात्राओं ने हॉस्टल खाली कर दिया है. हॉस्टल फिलहाल सुनसान पड़ा है. हालांकि, न्यूज़ 24 की टीम ने जब मौके पर जाकर पड़ताल की तो हॉस्टल के अंदर की कुछ तस्वीरें सामने आईं, जो कई सवाल खड़े करती हैं. बाहर से देखने पर हॉस्टल का कोई साइन बोर्ड तक नहीं दिखता, जिससे यह एक सामान्य आवासीय मकान प्रतीत होता है, लेकिन अंदर का नजारा बिल्कुल अलग है. भीतर एक आलीशान ड्रॉइंग रूम, सुसज्जित कमरे और पार्किंग में खड़ी महंगी गाड़ियां हॉस्टल के कथित “साधारण” स्वरूप पर सवाल खड़े करती हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्हें यही जानकारी थी कि मकान मालिक ने यह इमारत किसी को लीज पर दे रखी है. अधिकतर लोगों को यह तक स्पष्ट नहीं था कि यहां गर्ल्स हॉस्टल संचालित किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इस हॉस्टल में करीब 30 छात्राएं रहती थीं. इमारत की तीन मंजिलों पर रहने के कमरे बने हुए थे, जबकि चौथी मंजिल पर कैंटीन संचालित की जा रही थी.
बताया जा रहा है कि यदि नीट की तैयारी कर रही छात्रा का यह मामला सामने नहीं आता, तो शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की गतिविधियां शायद कभी उजागर नहीं होतीं. यह हॉस्टल वर्ष 2023 से संचालित हो रहा था, लेकिन 6 जनवरी 2026 के बाद से यह लगातार सुर्खियों में है.
जहानाबाद जिले की रहने वाली थी छात्रा
मृतक छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी. वह 5 जनवरी को अपने गांव से पटना लौटी थी. अगले ही दिन, यानी 6 जनवरी को, उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे कदमकुआ स्थित प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. यहीं से पूरा मामला और अधिक पेचीदा होता चला गया. परिजनों का आरोप है कि छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था और इसी के चलते उसकी हालत बिगड़ी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और पुलिस दोनों ने शुरुआत से ही इन आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया.
परिजनों का कहना है कि उन्होंने बार-बार छात्रा के साथ यौन अपराध की आशंका जताई, लेकिन न तो पुलिस ने समय पर प्राथमिकी दर्ज की और न ही प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया. उल्टे, आरोपों से इनकार किया जाता रहा. अंततः छात्रा की हालत और बिगड़ने पर परिजन उसे पटना के मेदांता हॉस्पिटल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
सामने आई पुलिस की लापरवाही
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना 6 जनवरी की होने के बावजूद इस मामले में प्राथमिकी 9 जनवरी को दर्ज की गई. इस देरी को लेकर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किए जाने के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों बैकफुट पर नजर आ रहे हैं.
इस मामले को लेकर पटना से लेकर जहानाबाद तक लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. शनिवार को भी जहानाबाद में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़कों पर उतरकर छात्रा को न्याय दिलाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि शुरुआत में ही पुलिस और अस्पताल ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद छात्रा की जान बचाई जा सकती थी.
एसआईटी की जांच जारी
फिलहाल, एसआईटी की जांच जारी है. पुलिस का दावा है कि हॉस्टल प्रबंधन, अस्पताल प्रशासन और अब तक की पूरी जांच प्रक्रिया की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है. लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्रा को समय पर न्याय मिल पाएगा, और क्या शम्भू गर्ल्स हॉस्टल की “काली करतूतें” पूरी तरह सामने आ पाएंगी या फिर यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएगा.
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और जनसुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर छात्रा के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे. दोनों नेताओं ने परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया और निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को सिस्टम की विफलता बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही.