Science News in Hindi: अंतरिक्ष की रचना को समझने और अंधेरे में छिपे राज को खोलने के लिए कई देशों की स्पेस एजेंसियां लगी हुई है, जो अपने अक्सर अपने स्पेस प्रोग्राम लॉन्च करती रहती है. इसी खोज में वैज्ञानिक एक ऐसे ग्रह में पहुंच गए, जो इंसानी सोच से काफी दूर थी, या कहा जाएगी वह सपनों की दुनिया थी. दरअसल, वैज्ञानिकों की खोज उन्हें 2 ऐसे ग्रह पर ले गई, जहां आसमान से पानी नहीं, बल्कि हीरों की बारिश होती है, जिसे वैज्ञानिक सबसे अमीर ग्रह भी कहते हैं.
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किन ग्रहों पर होती है हीरों की रहस्यमयी बारिश Diamond Rain Planet
आपको जानकर हैरानी होगी कि यह दोनों ही ग्रह हमारे सौरमंडल में स्थित है. इनके नाम यूरेनस (Uranus) और नेपच्यून (Neptune) हैं, यूरेनस पृथ्वी से औसतन लगभग 2.6 से 3.0 अरब किमी (1.7 – 2.0 अरब मील) दूर है, जबकि नेपच्यून और भी अधिक दूर, लगभग 4.3 से 4.7 अरब किमी (2.7 – 2.9 अरब मील) दूर स्थित है. इन ग्रहों पर स्टडी करते हुए वैज्ञानिकों ने पाया कि यहां की मौसम की स्थिति पृथ्वी के मुकाबले बहुत ज्यादा ही अजीबोगरीब है. यहां वातावरण में हर वक्त हीरा बनने की प्रक्रिया चलती रहती है.
कैसे बनते हैं इन ग्रहों पर हीरे? Formation of Diamonds?
वैज्ञानिकों की टीम ने जब इस अजीबोगरीब स्थिति पर और स्टाडी की और जानने की कोशिश की कि आखिर इन दोनों ग्रहों में हीरों की बारिश क्यों और कैसे होती है, तो उन्होंने पाया कि यूरेनस और नेपच्यून का पूरा वातावरण मीथेन गैस (Methane Gas) से भरा हुआ है. मिथेन में कार्बन मौजूद होता है और यही कार्बन हीरो के बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि गैस से कैसे हीरे बनते हैं? बता दें कि हीरा बनने के लिए मीथेन का टूटना काफी जरूरी होता है, ऐसे में इस ग्रह में यह काम वहां मौजूद अत्यधिक दबाव और तापमान करते है. इस स्थिति में मीथेन के मोलेक्युल्स (अणु) टूट जाते हैं, जिससे कार्बन के छोटे-छोटे कण (Particles) बनने शुरू हो जाते हैं, जो बाद में हीरे का रूप लेते हैं.
अंतरिक्ष में कैसे होती है हीरों की बारिश? Heere Ki Baarish Kaise Hoti Hai
मीथेन (Methane) से टूटकर कार्बन परमाणुओं में बदल जाते हैं. ये कार्बन परमाणु धीरे-धीरे आपस में जुड़कर ठोस और बेहद मजबूत हीरे के क्रिस्टल का निर्माण करने लगते हैं. जैसे ही ये हीरे बनते हैं, ग्रह का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) उन्हें अपनी ओर खींचता है, जिससे ये क्रिस्टल गहराई की ओर गिरने लगते हैं. वैज्ञानिक इस अनोखी प्रक्रिया को ही ‘हीरों की बारिश’ (Diamond Rain in Space) कहते हैं, जो अंतरिक्ष के सबसे रहस्यमयी और रोमांचक घटनाओं में से एक मानी जाती है.
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