5 साल का इंतजार, करोड़ों का खर्च… मंगल के चांद से मिट्टी क्यों लाना चाहता है जापान?

जापान का MMX मिशन मंगल के चांद फोबोस से मिट्टी और पत्थरों के नमूने धरती पर लाने की तैयारी कर रहा है. जानिए इस मिशन से मंगल के पानी, चांदों की उत्पत्ति और भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के बारे में क्या पता चल सकता है.

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जापान मंगल ग्रह के रहस्यों को समझने के लिए एक खास अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहा है (Photo-ANI)

जापान मंगल ग्रह के रहस्यों को समझने के लिए एक खास अंतरिक्ष मिशन पर काम कर रहा है. जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के इस मिशन का नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है. इसका मकसद मंगल के चांद से मिट्टी और पत्थरों के नमूने इकट्ठा करना और उन्हें धरती पर लाना है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों से मंगल के चांद बनने की कहानी समझने में मदद मिलेगी. साथ ही, मंगल पर कभी पानी था या नहीं और वहां जीवन के लिए जरूरी चीजें मौजूद थीं या नहीं, इस बारे में भी नई जानकारी मिल सकती है.

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कब मंगल पहुंचेगा जापान का अंतरिक्ष यान?

MMX मिशन के तहत अंतरिक्ष यान को H3 रॉकेट की मदद से भेजने की योजना है. दिए गए मिशन कार्यक्रम के मुताबिक, इसके 2027 में मंगल के पास पहुंचने और 2031 तक नमूने लेकर धरती पर लौटने का लक्ष्य रखा गया है. मिशन के दौरान यान मंगल के दोनों चांदों का अध्ययन करेगा. इसके बाद यह फोबोस की सतह से मिट्टी और पत्थरों के नमूने इकट्ठा करेगा.

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मंगल के दो चांद कैसे बने?

मंगल के दो प्राकृतिक चांद हैं, जिनके नाम फोबोस और डाइमोस हैं. वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इनका जन्म कैसे हुआ. एक संभावना यह है कि ये छोटे ब्रह्मांड के पिंड थे, जो मंगल के गुरुत्वाकर्षण(Gravity) के कारण उसके चारों ओर घूमने लगे. दूसरी संभावना यह है कि किसी बड़े पिंड की मंगल से टक्कर के बाद निकले मलबे से इनका निर्माण हुआ. फोबोस से मिलने वाले नमूनों की जांच से वैज्ञानिकों को इन दोनों संभावनाओं में से सही जवाब के करीब पहुंचने में मदद मिल सकती है.

सिर्फ मिट्टी लाने में पांच साल क्यों लगेंगे?

सवाल उठता है कि मंगल तक पहुंचने में करीब एक साल लग सकता है, तो नमूने लेकर लौटने में इतना समय क्यों लगेगा? इसका जवाब मिशन की जटिलता में छिपा है. अंतरिक्ष यान को फोबोस के आसपास पहुंचकर उसकी सतह और बनावट का बारीकी से अध्ययन करना होगा. उसे ऐसी जगह तलाशनी होगी, जहां सुरक्षित तरीके से उतरकर नमूने इकट्ठा किए जा सकें. फोबोस की सतह पर उतरना, नमूने लेना और फिर धरती की ओर वापसी की यात्रा शुरू करना आसान काम नहीं है. अंतरिक्ष में दूरी, यान की गति और सही समय पर रास्ता बदलने जैसी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है. यही वजह है कि इस मिशन को पूरा होने में कई साल लगेंगे.

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क्या मंगल पर पानी होने का राज खुलेगा?

वैज्ञानिकों को मंगल पर अरबों साल पहले पानी मौजूद होने के संकेत मिले हैं. वहां कभी झीलें और नदियां रही होंगी, ऐसी संभावना भी जताई जाती है. अगर फोबोस के नमूनों में मंगल की सतह से आए कण मिलते हैं, तो उनकी जांच से पानी से जुड़े खनिजों और कार्बनिक पदार्थों के बारे में जानकारी मिल सकती है. इससे मंगल के पुराने वातावरण और वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां होने की संभावना को समझने में मदद मिलेगी. हालांकि, इन नमूनों से जीवन के प्रमाण मिलेंगे ही, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता.

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए क्यों अहम है MMX?

इससे वैज्ञानिकों को मंगल के आसपास के वातावरण और अंतरिक्ष में मौजूद खतरों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है. भविष्य में मंगल पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों और यानों के लिए विकिरण जैसे जोखिमों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण होगा. MMX से मिलने वाले आंकड़े इस दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं. कुल मिलाकर, जापान का यह मिशन मंगल के चांदों की उत्पत्ति, मंगल के पुराने वातावरण और भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश है. अगर नमूने सफलतापूर्वक धरती पर आ गए, तो वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के इतिहास को समझने का एक नया मौका मिलेगा.

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