Sacred Tree of Hindu: हिन्दू धर्म में आंवला या आमला बहुत खास और पवित्र वृक्ष माना जाता है। यह पेड़ भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। मान्यता है कि वे इस पेड़ में साक्षात वास करते हैं। पुराणों के अनुसार, आंवला ब्रह्मा जी के आंसू उत्पन्न हुआ है। स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार, इस पेड़ की जड़ में भगवान विष्णु, इसकी शाखाओं में देवता और ऋषिगण और इसके शीर्ष पर हमारे पूर्वज निवास करते हैं। वहीं, पद्म पुराण में कहा गया है कि आंवला के पेड़ के बारे में केवल सोचने से ही उतना पुण्य मिलता है, जितना हजारों गायों का दान करने से प्राप्त है। इसके पेड़ को छूने मात्र से यह पुण्य दोगुना हो जाता है और यदि इसके नीचे बैठकर भोजन किया जाए तो तीन गुना अधिक लाभ होता है।
पद्म पुराण में यह बताया गया है कि आंवला की माला पहनने से पुण्य प्राप्त होता है। यह पेड़ भगवान शिव, पार्वती, विष्णु, लक्ष्मी, गंधर्व और कार्तिकेय को बहुत प्रिय है। आंवले के महत्व देखते हुए और इस वृक्ष की दिव्यता को उजागर करने के लिए हिन्दू धर्म दो विशेष पर्व रखे जाते हैं, ये हैं- आमलकी एकादशी और आमला नवमी। आमलकी एकादशी व्रत फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है, जबकि आमला नवमी व्रत कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इन दोनों पर्वों के दिन की गई पूजा-अर्चना और दान से अक्षय फल मिलता है।
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घर में आंवले का पेड़ लगाने का नियम
हिंदू धर्म में आंवले के पेड़ का धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। तुलसी विवाह के दौरान आंवले के वृक्ष के पास पूजा की जाती है, जिससे इसका धार्मिक महत्व बढ़ जाता है। मान्यता है इसे घर के पास लगाने से घर और परिवार के सदस्यों के ऊपर देवताओं की कृपा सदैव बनी रहती है। ज्योतिषियों और पंडितों के अनुसार, आंवले की नियमित पूजा-पाठ से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है और घर में सकारात्मकता आती है। यही कारण है कि इसे घर के पास लगाया जाता है। शहरों में आजकल बहुत से लोग इसे अपने बालकनी या टेरेस पर गमले लगाते हैं। आइए जानते हैं, घर में आंवले का पेड़ लगाने का नियम क्या है?
प्रचलित मान्यताओं और रिवाजों के अनुसार, आंवले का पौधा लगाने के लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन सबसे अच्छा होता है। 10 मार्च, 2025 को आमलकी एकादशी इसके लिए साल का सबसे अच्छा दिन बताया जाता है। यदि आमलकी एकादशी के दिन इसे लगाते हैं, तो उसमें कलावा 7 बार अवश्य बांधें। इससे पारिवारिक और वैवाहिक जीवन सुख में गुजरता है।
यदि आपके जीवन में बहुत परेशानियां और कष्ट हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार आप इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में लगा सकते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में आने वाली सारी परेशानियां दूर चली जाती हैं।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।