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हरिद्वार और प्रयागराज कुंभ से कितना अलग है ‘केरल कुंभ’, क्यों खास है ये अनोखा आयोजन?

केरल के तिरुनावाया में 'महामघ महोत्सवम' की भव्य शुरुआत हुई है, जिसे 'केरल कुंभ' भी कहा जाता है. भरतपुझा नदी के तट पर राज्यपाल ने इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव का उद्घाटन किया.

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 19, 2026 23:37
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हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक के कुंभ मेले के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दक्षिण भारत के केरल में भी कुंभ जैसा ही एक भव्य और प्राचीन धार्मिक आयोजन होता है. इसे ‘महामघ महोत्सवम’ कहा जाता है जिसे स्थानीय लोग और श्रद्धालु ‘केरल कुंभ’ के नाम से भी पहचानते हैं. साल 2026 में यह ऐतिहासिक आयोजन एक बार फिर पूरी भव्यता के साथ शुरू हो गया है जिसने केरल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है. यह महोत्सव न केवल केरल का एक बड़ा धार्मिक आयोजन है बल्कि यह दक्षिण भारत की उस महान परंपरा को भी सामने लाता है जो कुंभ मेले की तरह ही अटूट आस्था और सनातन संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है.

राज्यपाल ने किया ‘केरल कुंभ’ का उद्घाटन

केरल के मलप्पुरम जिले के तिरुनावाया में पवित्र भरतपुझा नदी के तट पर महामघ महोत्सवम 2026 का औपचारिक उद्घाटन 19 जनवरी 2026 को किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक धर्म ध्वजरोहण के साथ हुई जिसे सभी धार्मिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इस शुभ अवसर पर महामघ सभा के सभापति महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज, मोहनजी फाउंडेशन के चेयरमैन ब्रह्मर्षि मोहनजी और जमोरिन परिवार के सदस्यों सहित कई प्रमुख संत और विद्वान मौजूद रहे. इन महानुभावों की उपस्थिति ने इस पूरे आयोजन को और भी दिव्य और गरिमामय बना दिया.

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पवित्र स्नान से हुई शुरुआत

महोत्सव की मुख्य शुरुआत सुबह करीब 9 बजे नवमुकुंद मंदिर के स्नान घाट पर पहले पवित्र स्नान के साथ हुई. इस शाही स्नान का नेतृत्व महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज ने किया जिसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने नदी में डुबकी लगाई. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि महामघ काल के दौरान भरतपुझा नदी में स्नान करने से मनुष्य को आत्मिक शुद्धि मिलती है और महान पुण्य की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि इस पावन अवसर का हिस्सा बनने के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुनावाया पहुंच रहे हैं. नदी के तट पर मंत्रोच्चार और भजनों की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है और प्रशासन ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.

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आयोजन का सांस्कृतिक महत्व

इस भव्य आयोजन के बीच एक विवादित खबर भी सामने आई जब तमिलनाडु सरकार द्वारा तिरुमूर्थिमलाई से शुरू हुई एक रथ यात्रा को बीच में ही रोक दिया गया. इस मुद्दे को लेकर महामंडलेश्वर स्वामी आनंदवनम भारती महाराज ने तिरुनावाया स्थित कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई ताकि स्थिति को स्पष्ट किया जा सके. तमाम चुनौतियों के बावजूद लोगों में इस केरल कुंभ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है. महामघ महोत्सवम केवल एक मेला नहीं है बल्कि यह केरल की उस प्राचीन पहचान को जीवित रखने का जरिया है जो सदियों से चली आ रही है. यही वजह है कि अब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से केरल कुंभ को लेकर लोगों की जिज्ञासा और दिलचस्पी लगातार बढ़ती जा रही है.

First published on: Jan 19, 2026 11:37 PM

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