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Guru Kripa Tips: गुरु कृपा चाहिए तो ध्यान रखें ये 5 बातें, एक भी गलती पड़ सकती है भारी

Guru Kripa Tips: भारतीय संस्कृति में गुरु जीवन के सच्चे मार्गदर्शक माने जाते हैं. गुरु कृपा केवल पूजा से नहीं, बल्कि सही आचरण से मिलती है. छोटी सी भूल भी प्रगति रोक सकती है. क्या आप जानते हैं गुरु के सामने कौन सी गलतियां भारी पड़ती हैं? इन्हें जानिए विस्तार से.

Author Written By: Shyamnandan Updated: Dec 27, 2025 15:51
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Guru Kripa Tips: भारतीय संस्कृति में गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं होते, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक माने जाते हैं. शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है, क्योंकि वही अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं. गुरु कृपा केवल पूजा से नहीं, बल्कि सही आचरण और व्यवहार से प्राप्त होती है. कई बार छोटी-छोटी गलतियां भी जीवन की प्रगति को रोक देती हैं. इसलिए गुरु के प्रति आचरण में विशेष सावधानी जरूरी है. आइए जानते हैं, गुरु के सामने कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

गुरु के आसन का सम्मान

गुरु जहां बैठते हैं, वह केवल स्थान नहीं बल्कि ज्ञान का प्रतीक होता है. शिष्य को कभी भी गुरु के आसन पर बैठने की भूल नहीं करनी चाहिए. यह आदर और मर्यादा का विषय है. ऐसा करने से गुरु परंपरा का अपमान माना जाता है और मन में अहंकार भी बढ़ता है.

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बैठने और चलने का शिष्टाचार

गुरु के सामने बैठते समय शरीर की भाषा भी बहुत मायने रखती है. गुरु की ओर पैर करके बैठना या लेटे रहना असम्मान का संकेत है. सामने से गुजरते समय भी संयम और नम्रता रखनी चाहिए. यह छोटा सा अनुशासन गुरु कृपा को मजबूत करता है.

वाणी में संयम और मधुरता

गुरु के सामने बोलते समय शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए. कटु, अभद्र या व्यंग्यात्मक भाषा गुरु के मन को ठेस पहुंचाती है. मधुर वाणी, शांति और विनम्रता शिष्य की पहचान होती है. गुरु की उपस्थिति में मौन भी कई बार सबसे बड़ा सम्मान बन जाता है.

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अहंकार और दिखावे से दूरी

धन, पद या सफलता का घमंड गुरु के सामने कभी नहीं दिखाना चाहिए. गुरु का ज्ञान किसी भी भौतिक उपलब्धि से बड़ा होता है. जो शिष्य विनम्र रहता है, वही आगे बढ़ता है. अहंकार गुरु कृपा के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बनता है.

निंदा से बचाव

कभी भी गुरु की आलोचना या निंदा दूसरों के सामने नहीं करनी चाहिए. यह न केवल अनैतिक है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक हानि भी करता है. यदि कोई और ऐसा करे, तो उसे भी रोकना चाहिए. गुरु के प्रति निष्ठा शिष्य की सबसे बड़ी पूंजी होती है.

इन बातों का भी रखें ध्यान

गुरु की आज्ञा को हल्के में न लें. समय का पालन करें और सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें. गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जीवन में उतारने का प्रयास करें. सेवा भाव और कृतज्ञता गुरु कृपा को और मजबूत बनाती है. गुरु का स्मरण केवल शब्दों से नहीं, कर्म से होना चाहिए.

सही आचरण से खुलते हैं सफलता के मार्ग

जो शिष्य गुरु के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और संयम रखता है, उसके जीवन में स्वतः स्थिरता आती है. गुरु कृपा से न केवल शिक्षा, बल्कि सोच, निर्णय और चरित्र भी मजबूत होता है. यही सच्चे अर्थों में जीवन को ऊंचाई देता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Dec 27, 2025 03:51 PM

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