नो हॉर्न...नो ट्रैफिक, भारत के इस पड़ोसी देश में नहीं है कोई ट्रैफिक लाइट्स; बिना सिग्नल के कैसे चलता है सिस्टम?
भूटान दुनिया का एक ऐसा देश है जहां ट्रैफिक लाइट्स नहीं हैं, फिर भी यहां ट्रैफिक जाम देखने को नहीं मिलता. यहां का ट्रैफिक सिस्टम अनुशासन, आपसी समझ और पुलिस के इशारों पर चलता है.

भूटान-बिना ट्रैफिक लाइट वाला देश
2 / 7भूटान दुनिया का इकलौता ऐसा देश माना जाता है जहां ट्रैफिक लाइट्स नहीं हैं. यहां की राजधानी थिम्फू भी बिना सिग्नल के चलती है, जो इसे दुनिया के बाकी शहरों से अलग बनाती है.
ट्रैफिक कैसे चलता है बिना सिग्नल?
3 / 7यहां ट्रैफिक पुलिसकर्मी चौराहों पर खड़े होकर हाथों के इशारों से ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं. वो स्पेशल ट्रेनिंग लेकर तालमेल के साथ वाहनों को दिशा देते हैं.
लोगों की समझ और अनुशासन सबसे बड़ी ताकत
4 / 7भूटान में ड्राइवर एक-दूसरे से आंखों के संपर्क और इशारों के जरिए रास्ता तय करते हैं. यहां ट्रैफिक नियमों का पालन अपनी इच्छा से होता है, जिससे दुर्घटनाएं और जाम कम होते हैं.
ट्रैफिक लाइट लगाने की कोशिश हुई थी
5 / 7थिम्फू में एक बार ट्रैफिक लाइट लगाई गई थी, लेकिन लोगों को ये पसंद नहीं आई और कुछ ही दिनों में हटा दी गई. भूटान की आबादी काफी कम है, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या भी सीमित रहती है. यही वजह है कि ट्रैफिक लाइट्स की जरूरत महसूस नहीं होती.
शांति और संस्कृति का असर
6 / 7भूटान का ट्रैफिक सिस्टम उसकी संस्कृति को दर्शाता है, जहां लोग शांति, सम्मान को प्राथमिकता देते हैं. यहां का मकसद सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल नहीं बल्कि सामाजिक संतुलन भी है. ट्रैफिक लाइट्स न होने से बिजली की बचत होती है और प्रदूषण भी कम होता है. ये भूटान की पर्यावरण संरक्षण नीति से भी जुड़ा हुआ है.
क्या कभी जाम लगता है?
7 / 7हालांकि पीक टाइम में थोड़ी भीड़ हो सकती है, लेकिन ज्यादातर समय ट्रैफिक सुचारू रहता है क्योंकि लोग नियमों का पालन करते हैं. भूटान का ट्रैफिक सिस्टम ये दिखाता है कि बिना तकनीक के भी अनुशासन और सहयोग से व्यवस्था चलाई जा सकती है. (All Photos Credit: Social Media)
