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एक तरफ जहां दुनिया में युद्ध और अव्यवस्थाओं के चलते लोग पलायन कर रहे हैं, वहीं एक ऐसा भी देश है जहां करीब 90 लाख घर खाली पड़े हैं और वो अपने मालिक का इंतजार कर रहे हैं. हैरानी की बात ये है कि सरकार यहां लोगों को फ्री में रहने का मौका दे रही है, फिर भी लोग यहां रहना नहीं चाहते.
अजीबोगरीब संकट

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जापान जैसे विकसित देश में आज करीब 90 लाख घर पूरी तरह खाली पड़े हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'अकिया' कहा जाता है. इन घरों को बसाने के लिए सरकार मुफ्त घर और आर्थिक सहायता दे रही है, लेकिन लोग इनसे दूरी बनाए रख रहे हैं.
क्या होता है अकिया?

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जापान में अकिया का मतलब उन घरों से है जिनका कोई वारिस या रहने वाला नहीं बचा है, न कि किसी अंधविश्वास से जुड़ा नाम. ये घर सुविधासंपन्न होते हुए भी लंबे समय तक बंद पड़े रहने के कारण खंडहर जैसे दिखते हैं.
रिकॉर्ड खाली घरों की संख्या

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक खाली घरों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जो 2019 से आधे मिलियन से अधिक बढ़कर 90 लाख तक पहुंच गई है. जापान पॉलिसी फोरम के अनुसार, देश में कुल 6.1 करोड़ मकान हैं, जबकि मालिकाना हक सिर्फ 5.2 करोड़ लोगों के पास है.
गांवों की जनशून्य बस्तियां

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खाली घरों में अधिकांश ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में हैं, जहां आबादी लगातार घटती जा रही है. लगभग 4.4 मिलियन घर तो किराए के लिए भी उपलब्ध हैं, पर इन्हें किराएदार तक नसीब नहीं हो रहे हैं.
गिरती जनसंख्या और न्यून जन्मदर

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जापान की जनसंख्या लगातार कम हो रही है, जिसके चलते घर बेगाने पड़ रहे हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन एंड सोशल सिक्योरिटी के अनुसार, 2065 तक आबादी 12.7 करोड़ से घटकर 8.8 करोड़ रह सकती है, जिससे परिवार छोटे हो रहे हैं.
शहरों की तरफ बढ़ती महानगरीकरण

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बेहतर रोजगार और आधुनिक जीवनशैली की तलाश में ग्रामीण जनसंख्या टोक्यो जैसे बड़े शहरों में शिफ्ट हो गई है. इस वजह से गांवों के घर लावारिस छोड़ दिए गए हैं, जिससे 'अकिया' की समस्या और बढ़ी है.
जमीन के बजाय घर पर कम टैक्स

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जापान के स्थानीय नियमों के तहत खाली जमीन पर प्रॉपर्टी टैक्स ज्यादा लगता है, जबकि उस पर खड़ी इमारत पर कम लगता है. इसलिए मालिक पुराने घरों को गिराने के बजाय उन्हें खंडहर जैसे हाल में ही छोड़ देते हैं, जिससे समस्या बढ़ती है.
अकिया बैंक और फ्री घर

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जापान सरकार ने 2014 में अकिया बैंक नामक प्रोजेक्ट शुरू करके कई इलाकों में घरों को मुफ्त या न्यून कीमत पर उपलब्ध कराया है. ओकुतामा जैसे इलाकों में 100 वर्गमीटर का मकान महज 6 लाख रुपये में मिल सकता है, और सरकार मरम्मत पर आर्थिक सहायता भी दे रही है.