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USS George HW Bush: अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी करने के लिए भूमध्य सागर में तीसरा युद्धपोत तैनात कर दिया है। साल 2003 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब अमेरिका ने जंग के मैदान में 3 युद्धपोत तैनात किए हैं। जी हां, अमेरिका ने USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड फोर्ड के बाद अब USS जॉर्ज HW बुध को भी ईरान युद्ध में तैनात कर दिया है।
लाल सागर में हूती के हमले बढ़े

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बता दें कि मध्य पूर्व में अमेरिका को तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि ईरान के साथ तनाव चरम पर है और हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। इसलिए USS जॉर्ज HW बुश कैरियर ग्रुप पूर्वी भूमध्य सागर की ओर रवाना हो रहा है, जबकि USS गेराल्ड फोर्ड गुरुवार को स्वेज नहर पार करके लाल सागर में पहुंच चुका है।
यमन से संभावित हमले रोकेगा

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USS जॉर्ज HW बुश कैरियर ग्रुप के स्ट्राइक फाइटर्स और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यमन में संभावित हमलों का मुकाबला करेंगे, जो इजरायल या अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमला कर सकते हैं। अमेरिका का यह जंगी जहाज युद् करने में, दुश्मन की निगरानी करने में और मानवीय सहायता के लिए चलाए गए मिशन में इस्तेमाल हो सकता है। करीब 6000 नौसैनिक इसके सदस्य हैं।
90 फाइटर जेट से लैस वॉरशिप

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USS जॉर्ज HW बुश करीब 1092 फीट (333 मीटर) लंबा है और इसका वजन 100000 टन से ज्यादा है। इसकी मैक्सिमम स्पीड 30 समुद्री मील से ज्यादा है। इस पर 2 परमाणु रिएक्टर लगे हैं और यह बिना ईंधन के 20 साल तक समुद्र में रहकर सेवाएं दे सकता है। 90 से ज्यादा लड़ाकू विमान यानी F-35 और F/A-18 सुपर हॉर्नेट से लैस यह जंगी जहाज बेहद विध्वंसक हो सकता है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस

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USS जॉर्ज HW बुश गाइडेड मिसाइल क्रूजर, मल्टी-लेयर सिक्योरिटी और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है। इसका घुमावदार फ्लाइट डेक और बल्बनुमा धनुष डिजाइन वाली पतवार इसे किसी भी दिशा में मुड़ने और हमला करने में सक्षम बनाती है। इस वॉरशिप से किसी भी दिशा में दुश्मन के खिलाफ समुद्र से 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक सटीक हमला किया जा सकता है।
अमेरिकी नौसेना का 10वां युद्धपोत

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USS जॉर्ज HW बुश अमेरिकी नौसेना का 10वां और निमित्ज कैटेगरी का आखिरी वॉरशिप है। इसका नाम अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति और केंद्रीय खुफिया विभाग के 11वें डायरेक्टर जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है। इसका निर्माण 2003 में वर्जीनिया के न्यूपोर्ट न्यूज स्थित नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन में शुरू हुआ था और साल 2009 में 6.2 अरब डॉलर की लागत से पूरा हुआ था। इसका गृह बंदरगाह वर्जीनिया के नॉरफॉम नेवी बेस है।