5 April History of the Day: एक चूक ने छीनी थी 936 लोगों की जिंदगी, पढ़ें दूसरे विश्व युद्ध की सबसे भयानक त्रासदी की कहानी

Aaj Ka Itihas 5 April: दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के दरवाजे पर खड़ी है। जबकि आज से 83 साल पहले हुए दूसरे विश्व युद्ध के जख्म आज भी भरे नहीं हैं। दूसरे विश्व युद्ध के इतिहास में एक भयानक त्रासदी का जिक्र मिलता है, जो अमेरिकी वायुसेना की एक गलती की वजह से घटी थी और 936 लोगों की जान चली गई थी। आइए जानते हैं कि आज ही के दिन 83 साल पहले क्या हुआ था?

5 April History of the Day
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5 अप्रैल 1943 को अमेरिकी वायुसेना के एयरक्राफ्ट ने गलती से बेल्जियम के मोर्टसेल शहर में रिहायशी इलाके में बम गिरा दिया था। हालांकि बम का निशाना जर्मनी की वायुसेना के लिए पुर्जे बनाने वाला एर्ला कारखाना था, जो रिहायशी इलाके से एक किलोमीटर दूर था, लेकिन गलती से कुछ बम रिहायशी इलाके में गिर गए, जिन्होंने आधे से ज्यादा शहर को तबाह कर दिया था।

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अमेरिकी की वायुसेना से गिराए थे कई बम

अमेरिकी की वायुसेना से गिराए थे कई बम2 / 7

युद्ध में अमेरिका बेल्जियम का सहयोगी देश था, लेकिन इसी सहयोगी देश की एक गलती ने 3000 से ज्यादा घरों, स्कूलों और अस्पतालों को मलबे का ढेर बना दिया था। 900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जिसमें 209 बच्चे भी शामिल थे। 1300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सड़कों पर शवों की लाइनें लग गई थीं। यह हमला युद्ध में की गई सबसे घातक गलतियों में से एक माना गया था।

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मोर्टसेल पर जर्मनी सेना ने कब्जा किया था

मोर्टसेल पर जर्मनी सेना ने कब्जा किया था3 / 7

बता दें कि बेल्जियम में एंटवर्प के पास मोर्टसेल नामक कस्बा है। दूसरे विश्व युद्ध में इस कस्बे पर जर्मनी की सेना ने कब्जा कर लिया था। क्योंकि इस शहर में जर्मनी की सेना का विमान बनाने का कारखाना था तो अमेरिकी सेना ने इस कारखाने को उड़ाने की योजना बनाई। 5 अप्रैल 1943 को कारखाने पर बमबारी होनी थी। अमेरिकी और ब्रिटिश सेना के 83 विमान हमला करने के लिए मोर्टसेल की ओर रवाना हुए।

मोर्टसेल पर 800 से ज्यादा बम गिराए गए थे

मोर्टसेल पर 800 से ज्यादा बम गिराए गए थे4 / 7

अमेरिकी और ब्रिटिश सेना ने टागरेट तलाशकर 800 से ज्यादा बम गिराए। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मोर्टसेल में रिहायशी इलाके में भी बम गिर रहे हैं। उन्हें स्कूल कारखाने की तरह नजर आया तो बमबारी कर दी। जांच करने पर पता चला कि कारखाने पर तो 4 ही बम गिरे थे। बाकी बम तो शहर के अंदर गिर गए। इस तरह दूसरे विश्व युद्ध में सबसे ज्यादा मृतकों की संख्या बेल्जियम में रही।

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मोर्टसेल पर गिरे बमों का वजन 300 टन था

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अमेरिकी सेना ने 70 फ्लाइंग फोर्ट्रेस और 25 लिबरेटर विमान एंटवर्प की ओर भेजे थे, जिन पर लदे करीब 800 बमों का वजह 300 टन से ज्यादा था। दोपहर एक बजे से सभी विमान इंग्लैंड के दक्षिण में बने अपने ठिकानों से रवाना हुए। दोपहर करीब 3:30 बजे मोर्टसेल के ऊपर बमवर्षक विमान दिखाई दिए। लगभग 7000 मीटर (लगभग 25000 फीट) की ऊंचाई पर उड़ते हुए अमेरिकी बमवर्षक विमान बम गिराने के लिए तैयार थे।

600 बम एर्ला नदी के पास इलाके में गिर थे

 600 बम एर्ला नदी के पास इलाके में गिर थे6 / 7

अमेरिकी सेना के हमले में एर्ला कारखाने को भारी नुकसान पहुंचा। कारखाने में काम करने वाले 307 मजदूर मारे गए। 600 बम एर्ला नदी के पूर्व में स्थित ओउडे-गॉड इलाके में गिरे, जहां 4 स्कूल मलबे का ढेर बन गए थे। मलबे के नीचे दबकर 61 छात्रों और 5 ननों की मौत हुई थी। एडेगेम स्ट्रीट स्थित सेंट विंसेंट स्कूल में 103 छात्र और 3 शिक्षक मारे गए थे। बमों के गिरने से हुए धमाके की चपेट में 2 बच्चों की मौत हो गई थी।

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107 शवों की पहचान तक नहीं हो पाई थी

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एगेस्ट्राट में गुइडो गेजेल लड़कों का स्कूल पर भी बम गिरे। मलबे के नीचे दबकर दम घुटने से 23 लड़कों की मौत हो गई थी। ओउडे-गॉड के उत्तर में स्थित गेवर्ट फैक्ट्री में भी 43 श्रमिकों की जान चली गई थी। 107 शवों की पहचान तक नहीं हो पाई थी। 829 शवों की पहचान रिश्तेदारों ने की थी। मृतकों में 18 वर्ष से कम उम्र के 258 बच्चे शामिल थे। 110 लोग अपने घरों में, 199 लोग खुली सड़कों पर और 148 लोग अस्पताल में मारे गए थे।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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