
1 / 7
ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल का लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सैन्य संघर्ष तक पहुंच गया है. पिछले 3 दिनों से ईरान और यूएस-इजरायल के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसका असर खाड़ी के कई अन्य देशों में भी देखने को मिला है.

2 / 7
ईरान ने अपने पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशान बनाया, साथ ही उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए बड़ी कंपनियों को भी निशाना बनाया. ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है, जिससे उसकी रडार पर कई बड़े देश हैं. हालांकि खाड़ी देशों के पास कई एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम भी हैं, जिन्होंने ईरान की मिसाइलों को हवा में ही राख बना दिया.

3 / 7
UAE ने 96% मिसाइलों को किया ढेर
हालिया हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को सबसे अधिक प्रोजेक्टाइल्स का सामना करना पड़ा. ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों की 137 का पता लगाया गया, जिनमें से 132 को सफलतापूर्वक रोका गया. इससे यूएई की वायु रक्षा प्रणाली की 96% सफलता दर सामने आई.

4 / 7
कैसा है कतर का एयर डिफेंस?
कतर में अल उदेद एयर बेस स्थित है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र है. ईरानी हमलों के लिहाज से यह प्रमुख निशाना था. कतरी और अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम ने हवाई क्षेत्र में आने वाली 66 मिसाइलों में से अधिकांश को निष्प्रभावी कर दिया.

5 / 7
कुवैत और बहरीन की सफलता
बहरीन और कुवैत को भी अमेरिकी लॉजिस्टिक हब्स और फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर केंद्रित मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा. दोनों देशों ने पैट्रियट PAC-3 बैटरी सक्रिय कर छोटी-मध्यम दूरी की दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों को आबादी वाले इलाकों से पहले ही रोक लिया.

6 / 7
थाड और पैट्रियट की सुरक्षा शील्ड
खाड़ी देशों की ऊंची सफलता दर का आधार अमेरिकी थाड (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) और पैट्रियट सिस्टम हैं. थाड ऊंचाई पर बैलिस्टिक खतरों को रोकता है, जबकि पैट्रियट PAC-3 मिसाइलों को उनके अंतिम चरण में नष्ट करता है.

7 / 7
ड्रोन स्वार्म बने चुनौती
बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में खाड़ी देश माहिर हैं, लेकिन शाहेद-136 जैसे कम उड़ान वाले ड्रोन स्वार्म्स को निष्प्रभावी करना जटिल है. इसकी काउंटर के लिए यूएई जैसे देश रूसी पैंटसीर-S1 जैसी तेज फायरिंग सिस्टम पर निर्भर हो रहे हैं.