कौन हैं RG Kar पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ? जिन्हें आगे रख BJP ने जीता बंगाल

West Bengal Assembly Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में सबसे चौंकाने वाला और भावुक कर देने वाला परिणाम उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी सीट से आया है. यहां से BJP प्रत्याशी रत्ना देबनाथ ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. जानें कौन हैं रत्ना देबनाथ? जिन्होंने चुनाव में पूरे बंगाल की महिलाओं का किया नेतृत्व?

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West Bengal Assembly Election Results: उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी सीट से BJP की टिकट पर चुनाव जीतीं  रत्ना देबनाथ कोई साधारण नेता नहीं, बल्कि अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई जघन्य घटना की शिकार जूनियर महिला डॉक्टर की मां हैं. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रत्ना देबनाथ को कुल 87,977 वोट प्राप्त हुए.

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TMC के गढ़ में बड़ी सेंध

TMC के गढ़ में बड़ी सेंध2 / 6

4 मई 2026 को घोषित चुनाव परिणामों के अनुसार, रत्ना देबनाथ ने सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, रत्ना को कुल 87,977 वोट मिले. यह जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि पानीहाटी को टीएमसी का अभेद्य किला माना जाता था. तीर्थंकर घोष के पिता निर्मल घोष यहां से पांच बार विधायक रहे थे, लेकिन इस बार जनता ने न्याय की गुहार लगा रही एक मां पर भरोसा जताया.

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रत्ना देबनाथ क्यों उतरीं राजनीति में?

रत्ना देबनाथ क्यों उतरीं राजनीति में? 3 / 6

रत्ना देबनाथ का राजनीति में आना महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक मां का अपनी बेटी के लिए न्याय का संघर्ष है. अगस्त 2024 में आरजी कर अस्पताल में उनकी बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को हिला दिया था. करीब 20 महीने तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बार-बार कहा कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ उनकी बेटी के लिए नहीं, बल्कि बंगाल की हर उस बेटी के लिए है जो असुरक्षित माहौल की शिकार हुई है.

रत्ना देबनाथ का कड़ा रुख और विवाद

रत्ना देबनाथ का कड़ा रुख और विवाद4 / 6

चुनाव से लगभग दो सप्ताह पहले, पनिहाटी से भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ का एक वीडियो वायरल हुआ. इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित तौर पर तीखी और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा. रत्ना देबनाथ के समर्थकों का मानना था कि यह एक पीड़ित मां का आक्रोश है, जो अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रही है.

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प्रतीकों की राजनीति: "मेरुदंड बिक्री नेई"

प्रतीकों की राजनीति: "मेरुदंड बिक्री नेई"5 / 6

रत्ना देबनाथ ने अपने प्रचार के दौरान "मेरुदंड बिक्री नेई" लिखे हुए संदेश वाली साड़ी पहनकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. यह सीधे तौर पर टीएमसी शासन और पुलिस प्रशासन पर हमला था, जिन्हें भाजपा 'रीढ़विहीन' और सत्ता के आगे झुका हुआ बता रही थी. नामांकन के दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की उपस्थिति ने इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. भाजपा ने उन्हें "बंगाल की हर महिला का प्रतिनिधि" बनाकर पेश किया.

जनता का मिला जबरदस्त समर्थन

जनता का मिला जबरदस्त समर्थन6 / 6

रत्ना देबनाथ ने अपने पूरे अभियान को 'महिला सुरक्षा' और 'न्यायिक जवाबदेही' के इर्द-गिर्द रखा, जिससे चुनाव केवल राजनीतिक न रहकर भावनात्मक और नैतिक बन गया. पानीहाटी की जनता ने न केवल उनकी पीड़ा को समझा, बल्कि इसे वोट में तब्दील कर व्यवस्था के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. हालांकि उनकी उम्मीदवारी पर नागरिक समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया थी, लेकिन चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया कि बंगाल की जनता अब बदलाव और सुरक्षा चाहती है.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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