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Mamta Banerjee Pension: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार करने पर राज्यपाल आरएन रवि को मजबूरन बंगाल विधानसभा को भंग करने का फैसला लेना पड़ा. सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी के बगावती तेवरों से उनकी पेंशन पर कोई फर्क पढ़ेगा. जानें, क्या कहते हैं नियम और कानून?
क्या कहता है संविधान?

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संविधान के अनुच्छेद 174 की सब धारा (2) के खंड (b) के तहत राज्यपाल आरएन रवि ने बंगाल को भंग करने का फैसला किया तो मुख्यमंत्री ममता का कार्यकाल इस्तीफा न देने के बाद भी स्वत: ही खत्म हो गया, ऐसे में उनकी शक्तियां भी सीमित हो गई हैं. ऐसे में क्या उनकी पेंशन पर फर्क पड़ेगा, जानें अगली स्लाइड में
क्या ममता बनर्जी को मिलेगी पेंशन?

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इस्तीफे से इनकार पर क्या ममता बनर्जी को मिलेगी पेंशन? इसपर नियम कहते हैं कि पेंशन मुख्यमंत्री के कार्यकाल पर निर्भर होती है, उनके इस्तीफे के कारणों पर नहीं. पिछले तीन साल के कार्यकाल तक ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री रही हैं तो ऐसे में उन्हें पेंशन का पूरा हक है.
इस्तीफा न देना अपराध नहीं

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ममता बनर्जी खुद इस्तीफा देती हैं या उन्हें बर्खास्त किया गया है, इससे उनकी पेंशन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इस्तीफा न देना कोई अपराध नहीं है. मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा होने पर ममता बनर्जी स्वत: पद से अलग मानी जाएंगी. वैसे ही यह राजनीतिक गतिरोध उनकी पेंशन को रोकने का कोई अधिकारिक पैमाना नहीं है.
क्या हैं पेंशन की शर्तें?

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मुख्यमंत्री पेंशन योजना के तहत पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों में एक निश्चित समय तक मुख्यमंत्री होना आवश्यक है, ममता बनर्जी तो 15 साल तक इस पद पर रही हैं तो ऐसे में कानून की नजर में इस्तीफे से इनकार करना उनकी पेंशन के रास्ते में रूकावट का कारण नहीं बन सकता.