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भारत का नक्शा देखने पर पश्चिम बंगाल देश के बिल्कुल पूर्वी हिस्से में दिखाई देता है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इस राज्य के नाम में 'West' यानी पश्चिम शब्द क्यों जुड़ा है. आइए जानते हैं इस नाम के पीछे की वजह?
कभी एक था पूरा बंगाल क्षेत्र

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आज का पश्चिम बंगाल पहले एक बड़े बंगाल क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था. यह इलाका संस्कृति, साहित्य, व्यापार और राजनीति का प्रमुख केंद्र माना जाता था. ब्रिटिश शासन के समय बंगाल प्रेसीडेंसी काफी विशाल थी, जिसमें आज का बांग्लादेश और आसपास के कई इलाके शामिल थे.
अंग्रेजों ने 1905 में किया पहला विभाजन

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ब्रिटिश सरकार ने बंगाल में बढ़ते राष्ट्रवाद को कमजोर करने के लिए 1905 में इसका विभाजन किया था. उस समय बंगाल को दो हिस्सों में बांटा गया. इस फैसले के खिलाफ लोगों ने जोरदार विरोध किया और स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ.
विरोध के बाद रद्द हुआ फैसला

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जनता के भारी विरोध और आंदोलन के दबाव के कारण अंग्रेजों को 1911 में यह फैसला वापस लेना पड़ा. हालांकि, इसी दौर में पूर्वी और पश्चिमी बंगाल की पहचान लोगों के बीच बनने लगी थी, जिसने आगे चलकर बड़ा असर डाला.
1947 के बंटवारे से जुड़ा है असली कारण

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भारत और पाकिस्तान के विभाजन के दौरान बंगाल को फिर दो हिस्सों में बांटा गया. बंगाल का पश्चिमी भाग भारत में शामिल हुआ, जबकि पूर्वी हिस्सा पाकिस्तान का हिस्सा बना. यहीं से 'West Benga' पश्चिम बंगाल नाम आधिकारिक तौर पर इस्तेमाल होने लगा.
बाद में बना बांग्लादेश

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जो इलाका पहले पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था, वही 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना. इसके बावजूद भारत के इस राज्य का नाम पश्चिम बंगाल ही बना रहा. यह नाम पुराने अखंड बंगाल के पश्चिमी हिस्से को दर्शाता है.
नाम बदलने की मांग भी उठती रही

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समय-समय पर राज्य का नाम बदलकर सिर्फ 'बंगाल' या 'बांग्ला' करने की मांग भी उठती रही है. कुछ लोग मानते हैं कि इससे दिशा को लेकर होने वाला भ्रम कम होगा और राज्य की पहचान ज्यादा सरल बनेगी, लेकिन आज भी इस राज्य का नाम पश्चिम बंगाल ही है, जो इस राज्य के इतिहास को बताती है. (Image: AI/Pexels)