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हम आपको ऐसे कहावत के बारे में बताएंगे, जिसको आपने कभी न कभी इस्तेमाल जरूर किया होगा 'कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली', लेकिन इसका इतिहास कितना पुराना है यह जानने के बाद आप भी हैरान रह जाएंगे.
आम बोलचाल की इस लाइन के पीछे छिपा है बड़ा इतिहास

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हम रोजमर्रा की बातचीत में 'कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली' जैसी कहावत सुनते और इस्तेमाल करते हैं. यह अक्सर दो लोगों के बीच अंतर बताने के लिए बोली जाती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प और ऐतिहासिक है, जिसके बारे में अक्सर लोगों को जानकारी नहीं होती.
कहावत के पीछे छिपा है असली युद्ध का किस्सा

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ज्यादातर लोग इसे सिर्फ मजाक या तुलना के रूप में जानते हैं, लेकिन यह कहावत एक ऐतिहासिक घटना से जुड़ी हुई है. यह कहानी सिर्फ दो नहीं बल्कि तीन राजाओं के बीच हुए संघर्ष को दर्शाती है, जिसकी जानकारी होना जरूरी भी है.
राजा भोज कौन थे

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राजा भोज 11वीं सदी के प्रसिद्ध शासक थे, जिनका शासन मध्य प्रदेश के धार क्षेत्र में था. वे परमार वंश के शक्तिशाली और विद्वान राजा माने जाते थे, जिनकी बहादुरी और बुद्धिमत्ता की चर्चा आज भी होती है.
इतिहास में दर्ज है राजा भोज का नाम

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इतिहासकारों के अनुसार, फारसी विद्वान अल-बरूनी ने भी अपने लेखों में राजा भोज का जिक्र किया है. कहा जाता है कि भोपाल शहर का पुराना नाम भोजपाल था, जिसे राजा भोज ने बसाया था.
तीन राजाओं के बीच हुआ था भयंकर युद्ध

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इस कहानी की शुरुआत तब हुई जब राजा भोज का युद्ध चेदि देश के राजा गांगेयदेव से हुआ. इस लड़ाई में दक्षिण के चालुक्य राजा जय सिंह तेलंग भी शामिल हो गए और मुकाबला बेहद मुश्किल हो गया.
दो शक्तिशाली सेनाओं के खिलाफ लड़ी जंग

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गोदावरी नदी के किनारे हुए इस युद्ध में राजा भोज अकेले थे, जबकि दूसरी तरफ दो राजाओं की संयुक्त सेना थी, इसके बावजूद राजा भोज और उनकी सेना ने अद्भुत साहस दिखाकर दोनों को पराजित कर दिया.
समय के साथ बदला शब्दों का रूप

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इस जीत के बाद लोगों के बीच एक वाक्य प्रचलित हुआ- 'कहां राजा भोज, कहां गांगेय तैलंग. हालांकि, धीरे-धीरे यह वाक्य बदलते हुए 'कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली' बन गया, जो आज एक प्रसिद्ध कहावत है. (Image: AI)