बड़े एयरपोर्ट पर क्यों होते हैं एक से ज्यादा टर्मिनल, क्या है इसकी जरूरत? यहां मिलेगा आपके सवालों का जवाब

hy Do Airports Have More Than One Terminal: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों के मॉडर्न एयरपोर्ट्स को हर साल लाखों पैसेंजर्स को संभालने के लिए डिजाइन किया जाता है, इसलिए स्मूद ऑपरेशन उनकी प्रायोरिटी होती है. बड़े एयरपोर्ट्स की एक खास बात ये है कि उनमें कई टर्मिनल होते हैं.

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एक ही बिल्डिंग से काम करने के बजाय, एयरपोर्ट्स अक्सर पैसेंजर्स की सर्विसेज को अलग-अलग टर्मिनल्स में बांट देते हैं ताकि काम बेहतर ढंग से हो, भीड़ कम हो और ट्रैवल एक्सपीरिएंस खुशनुमा रहे. टर्मिनल्स की संख्या आमतौर पर हवाई मुसाफिर की तादाद, एयरलाइन के ऑपरेशंस और फ्यूचर की प्लानिंग पर डिपेंड करती है.

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एक से ज्यादा टर्मिनल होने का सबसे बड़ा मकसद बड़ी तादाद में पैसेंजर्स को हैंडल करना है. जब किसी एयरपोर्ट पर रोजाना कई डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स आती हैं, तो एक ही टर्मिनल पर बहुत ज्यादा भीड़ हो सकती है. कई टर्मिनल्स एयर ट्रैवलर्स को अलग-अलग एरियाज में बांटने में मदद करते हैं, जिससे चेक-इन, सुरक्षा जांच, इमिग्रेशन, सामान को हैंडल करने और बोर्डिंग का काम तेजी से और ऑर्गेनाइज तरीके से होता है. इससे वेटिंग टाइम कम होता है और एयरपोर्ट के स्टाफ ज्यादा एफिशिएंट तरीके से काम कर पाते हैं.

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एयरपोर्ट्स एयरलाइन सर्विसेज के काम को ऑर्गनाइन करने के लिए भी अलग-अलग टर्मिनल्स का इस्तेमाल करते हैं. कई मामलों में, खास एयरलाइंस किसी एक ही टर्मिनल से ऑपरेट होती हैं. कुछ टर्मिनल खास तौर से डोमेस्टिक फ्लाइट्स के लिए रिजर्व हो सकते हैं, जबकि दूसरे टर्मिनल इंटरनेशनल सर्विसेज को हैंडल करते हैं जिनके लिए कस्टम और इमिग्रेशन सुविधाओं की जरूरत होती है. इस तरह के इंतेजाम मुसाफिरों की आवाजाही को आसान बनाती है और एयरलाइंस को अपनी फ्लाइट्स, ग्राउंड हैंडलिंग और कस्टमर सर्विसेज का बेहतर ढंग से कोऑर्डिनेट करने में मदद करती है.

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जैसे-जैसे पैसेंजर्स की डिमांड बढ़ती है, एयरपोर्ट्स अक्सर मौजूदा टर्मिनलों को बड़ा करने के बजाय नए टर्मिनल बनाकर एक्सपैंड करते हैं. पुरानी बिल्डिंग में बड़े बदलाव करने की तुलना में एक एक्सट्रा टर्मिनल बनाना आमतौर पर ज्यादा प्रैक्टिकल होता है. नए टर्मिनलों में ज्यादा एयरक्राफ्ट गेट, बड़े वेटिंग एरिया, मॉडर्न सिक्योरिटी सिस्टम और एडवांस्ड बैगेज हैंडलिंग टेक्नोलॉजी हो सकती है. वो एयरपोर्ट्स के नॉर्मल ऑपरेशंस में रुकावट डाले बिना फ्यूचर की ग्रोथ के लिए तैयार होने की सुविधा भी देते हैं.

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मॉडर्न एयरपोर्ट टर्मिनल्स में पैसेंजर्स के लिए कई तरह की फैसिलिटीज होती हैं. आप कंफर्टेबल लाउंज, रेस्तरां, कैफे, रिटेल स्टोर, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग, बच्चों के खेलने की जगह, प्रेयर रूम, मेडिकल सेंटर, बिजनेस लाउंज, मुफ्त वाई-फाई, चार्जिंग स्टेशंस और सेल्फ-सर्विस चेक-इन कियोस्क का फायदा उठा सकते हैं. कई एयरपोर्ट्स ट्रैवल एक्सपीरिएंस को और बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम, डिजिटल इंफॉर्मेशन डिस्प्ले और ऑटोमेटेड इमिग्रेशन गेट भी अवेलेबल कराते हैं.

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कई टर्मिनल एयरपोर्ट की सिक्योरिट और कामकाज में फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ाते हैं. अगर मेंटनेंस के काम, तकनीकी समस्याओं या इमरजेंसी सिचुएशन से किसी एक टर्मिनल पर असर पड़ता है, तो फ्लाइट्स अक्सर कम से कम रुकावट के साथ दूसरे टर्मिनल्स से ऑपरेट हो सकती हैं. एयरपोर्ट्स सीजनल ट्रैवल के पीक टाइम, चार्टर फ्लाइट्स या लो कॉस्ट एयरलाइंस के लिए अलग-अलग टर्मिनल भी तय कर सकते हैं, जिससे साल भर एयरक्राफ्ट और मुसाफिरों की आवाजाही बेहतर तरीके से मैनेज हो सके.

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इतना समझ लीजिए एक से ज्यादा टर्मिनल होना एक स्ट्रैटेजिक फैसला है जो एयरपोर्ट्स को पैसेंजर्स की बढ़ती डिमांड को पूरा करते हुए एफिशिएंट तरीके से काम करने में मदद करता है. कई टर्मिनल पैसेंजर्स की सुविधा बढ़ाते हैं, एयरलाइन के कामकाज में मदद करते हैं, हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाते हैं और फ्यूचर में एक्सपेंशन की गुंजाइश बनाते हैं. जैसे-जैसे दुनिया भर में एयर ट्रैवल बढ़ रहा है, एयरपोर्ट नए टर्मिनल और मॉडर्न फैसिलिटीज बनाने में इंवेस्ट कर रहे हैं ताकि हर साल लाखों ट्रैवर्स को सेफ, फास और ज्यादा बेहतर ट्रैवल एक्सपीरिएंस मिल सके.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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