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जब भी दुनिया में कहीं युद्ध छिड़ता है, तो उसका असर सिर्फ मिसाइलों और टैंकों तक ही सीमित नहीं रहता। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब कंडोम बाजार को भी प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रही है, जिससे भारत समेत दुनिया भर में कंडोम की गंभीर कमी का डर पैदा हो गया है। कंडोम निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की कमी और समुद्री मार्गों में रुकावट ने इस उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर

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ईरान-अमेरिका संघर्ष का सीधा असर कंडोम उत्पादन पर पड़ रहा है। कंडोम बनाने के लिए पेट्रोकेमिकल उत्पाद, सिलिकॉन तेल और अमोनिया जैसे रसायनों की आवश्यकता होती है। समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण इन कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमोनिया की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
निर्यात के मामले में अग्रणी देश

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महज 6 करोड़ की आबादी वाला थाईलैंड कंडोम निर्यात के मामले में दुनिया का अग्रणी देश है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, थाईलैंड इस मामले में सबसे आगे है। इसका मुख्य कारण वहां प्राकृतिक रबर (लेटेक्स) की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है।
क्यों है नंबर 1

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रबर उत्पादन में अग्रणी थाईलैंड कम लागत पर कच्चा माल उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, इसकी उन्नत विनिर्माण अवसंरचना और उच्च तकनीक वाली मशीनरी बड़े पैमाने पर उत्पादन को संभव बनाती है, जिससे यह वैश्विक बाजार में अपना दबदबा कायम कर पाता है।
सबसे ज्यादा खपत कहां

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कंडोम की खपत के मामले में भारत एशिया में दूसरे स्थान पर है। अमेरिका और चीन जैसे देश कंडोम के सबसे बड़े खरीदार हैं। दिलचस्प बात यह है कि औरंगाबाद भारत का मुख्य उत्पादन केंद्र है, जहां देश की दस सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनियों में से छह स्थित हैं। महाराष्ट्र का यह शहर कंडोम निर्माण का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।