अक्सर लोग अपना शहर छोड़ने के बाद जब किसी दूसरे शहर में नौकरी के लिए जाते हैं तो वो किराए के मकान में रहते हैं. कई बार उन्हें अपना मकान भी बदलना होता है. तो ऐसे आपने किराए का छोड़ दिया, सारा किराया समय पर भी दे दिया. बिजली पानी सभी बिल भी समय पर क्लियर कर दिए. घर भी ठीक स्थिति में वापस लैंडलॉर्ड को सौंप दिया. लेकिन जब बात सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस लेने की बात आती है तो कई मकान मालिक यह कहकर पैसा देने से मना कर देते हैं कि पेंटिंग का खर्च कटेगा, सफाई का पैसा कटेगा, दीवारों में निशान है या फिर घर का कोई आइटम खराब है और देखते ही देखते हजारों और कभी-कभी लाखों रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट रोक लिया जाता है.
कहां करनी है शिकायत?

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अब सवाल ये है कि क्या मकान मालिक इस तरह से आपका पैसा रोक सकते हैं? क्या कानून किराएदार को कोई अधिकार देता है? और अगर मकान मालिक पैसा वापस ना करें तो क्या करें? कहां शिकायत करें? कौन-कौन से सबूत आपके काम आएंगे? आज इस खबर में सिक्योरिटी डिपॉजिट से जुड़ी पूरी जानकारी आपको बताने जा रहे हैं.
क्या है रेंट एग्रीमेंट का महत्व?

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मकान मालिक के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले यह समझना जरूरी है कि रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) की कानूनी अहमियत क्या है. घर लेते समय जो एग्रीमेंट बनता है, उसमें सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि और उसे वापस करने की समय सीमा साफ-साफ लिखी होती है. आमतौर पर घर खाली करने या पजेशन सौंपने के 15 से 30 दिनों के भीतर मकान मालिक को यह पैसा लौटाना होता है.
मकान मालिक सिर्फ इन चीजों का रोक सकते हैं पैसा

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कानूनन, मकान मालिक केवल बकाया किराया, बिजली-पानी का बिल या किराएदार की लापरवाही से हुए बड़े नुकसान (जैसे दीवार या टाइल्स तोड़ना) की रकम ही डिपॉजिट से काट सकता है. घर में रहने के दौरान होने वाली सामान्य टूट-फूट, जैसे कि दीवारों का पुराना पेंट खराब होना या नलों का घिसना (Normal Wear and Tear), इसके दायरे में नहीं आता और इसके नाम पर मकान मालिक आपका पैसा नहीं रोक सकता.
पैसे न लौटाए तो क्या करें?

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अगर मकान मालिक बार-बार मांगने के बाद भी आपका पैसा नहीं लौटा रहा है, तो सबसे पहला कदम आपसी बातचीत और लिखित संवाद का होना चाहिए. आप उन्हें ईमेल या व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर रेंट एग्रीमेंट की शर्तों की याद दिलाएं और पैसे की मांग करें. लिखित रिकॉर्ड होना भविष्य में कानूनी कार्रवाई के लिए बहुत जरूरी होता है. इसके साथ ही, जब आप घर खाली कर रहे हों, तो पूरे घर की तस्वीरें और वीडियो जरूर बना लें. यह इस बात का पुख्ता सबूत होता है कि आपने घर को सही-सलामत स्थिति में छोड़ा है और मकान मालिक आप पर नुकसान का झूठा आरोप नहीं लगा सकता. अगर सोसाइटी या अपार्टमेंट एसोसिएशन है, तो आप इस विवाद को सुलझाने के लिए उनसे भी मध्यस्थता की अपील कर सकते हैं.
क्या है कानूनी रास्ता?

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जब बातचीत से बात न बने, तो आप कानूनी रास्ते का रुख कर सकते हैं. इसके लिए आप किसी वकील के जरिए मकान मालिक को एक औपचारिक 'लीगल नोटिस' (Legal Notice) भेज सकते हैं. इस नोटिस में रेंट एग्रीमेंट का हवाला देते हुए मकान मालिक को 15 दिनों के भीतर सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने की चेतावनी दी जाती है.
रेंट कंट्रोल एक्ट का भी होता है इस्तेमाल

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आमतौर पर कानूनी नोटिस मिलते ही कोर्ट-कचहरी के डर से अधिकांश मकान मालिक पैसा वापस कर देते हैं. लेकिन इसके बाद भी यदि कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो आप देश के 'रेंट कंट्रोल एक्ट' (Rent Control Act) या नए 'मॉडल टेनेंसी एक्ट' के तहत स्थापित रेंट अथॉरिटी या रेंट कोर्ट (Rent Court) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा, सेवा में कमी या धोखाधड़ी का मामला होने के कारण आप कंज्यूमर फोरम या सिविल कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं, जहां से मकान मालिक को ब्याज सहित पैसा लौटाने का आदेश जारी हो सकता है.