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भारत में काम करने के तरीके और सैलरी स्ट्रक्चर में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है. केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नए लेबर कोड तैयार किए हैं. इन नए नियमों के लागू होने के बाद आपकी इन-हैंड सैलरी, ऑफिस के घंटे और रिटायरमेंट फंड पर सीधा असर पड़ेगा. आज हम बताएंगे, कि वो कौनसे 11 बड़े बदलाव हैं, जो आपकी वर्क-लाइफ को पूरी तरह बदल देंगे. (AI Image)
4-डे वर्क वीक

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अब कंपनियां हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का मॉडल अपना सकेंगी. हालांकि, इसके लिए आपको ऑफिस में रोजाना 12 घंटे तक काम करना पड़ सकता है, क्योंकि हफ्ते में कुल 48 घंटे काम का नियम अनिवार्य होगा. (AI Image)
बेसिक सैलरी में बदलाव

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नए नियमों के मुताबिक, आपकी बेसिक सैलरी आपकी कुल सीटीसी का कम से कम 50% होनी चाहिए. इससे भत्ते 50% से ज्यादा नहीं हो पाएंगे. (AI Image)
इन-हैंड सैलरी पर असर

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बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ ज्यादा कटेगा, जिससे आपके हाथ में आने वाली मंथली सैलरी कम हो सकती है. लेकिन, यह आपकी लॉन्ग-टर्म सेविंग्स के लिए फायदेमंद होगा. (AI Image)
पीएफ और ग्रेच्युटी में इजाफा

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सैलरी का बड़ा हिस्सा बेसिक होने से कर्मचारी और कंपनी दोनों का पीएफ योगदान बढ़ जाएगा. साथ ही, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को अब 5 साल के बजाय मात्र 1 साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा. (AI Image)
ओवरटाइम के लिए डबल पैसा

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अगर आप तय घंटों से ज्यादा काम करते हैं, तो कंपनियों को अब ओवरटाइम के लिए सामान्य वेतन से दोगुना भुगतान करना होगा. (AI Image)
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट

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इस्तीफा देने या नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में, कंपनियों को अब केवल 2 वर्किंग डेज के भीतर कर्मचारी का पूरा बकाया चुकाना अनिवार्य होगा. (AI Image)
सैलरी पेमेंट की डेडलाइन

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महीने की सैलरी अगले महीने की 7 तारीख तक मिलनी जरूरी है. वहीं, दिहाड़ी मजदूरों को उसी दिन और साप्ताहिक कर्मचारियों को हफ्ते के आखिरी वर्किंग डे पर भुगतान करना होगा. (AI Image)
महिला कर्मचारियों के लिए नए नियम

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अब महिलाएं सभी क्षेत्रों में और नाइट शिफ्ट (रात 7 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले) में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते कंपनी उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे. (AI Image)
शिकायत निवारण समिति

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20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली हर कंपनी के लिए 'शिकायत निवारण समिति' बनाना अनिवार्य होगा, जिसमें महिला सदस्यों का होना जरूरी है. शिकायतों का निपटारा 30 दिनों में करना होगा. (AI Image)
छंटनी पर सख्त नियम

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300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी या बंदी के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी. छंटनी होने पर कर्मचारी को 50% वेतन, महंगाई भत्ता और 15 दिन की औसत सैलरी का मुआवजा मिलेगा. (AI Image)
हेल्थ चेकअप और कैंटीन

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100 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों में कैंटीन और निर्माण साइट्स पर एम्बुलेंस रूम अनिवार्य होगा. साथ ही, कर्मचारियों का फ्री हेल्थ चेकअप कराना भी कंपनी की जिम्मेदारी होगी. (AI Image)