US Green Card Rule: अमैरिका में नौकरी और घर बसाने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय टेक पेशेवरों के लिए एक बड़ी खबर आई है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को कड़ा करने के नए नियम के बाद भारतीय प्रवासियों में चिंता बढ़ गई थी. इस नियम के अनुसार, अस्थायी वीजा पर रहने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए अपने देश वापस लौटकर आवेदन करना पड़ सकता था. इससे टेक सेक्टर में काम कर रहे भारतीयों की नौकरी, परिवार और भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे.
USCIS के नए बयान से मिली बड़ी राहत

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बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है. यूएससीआईएस के प्रवक्ता जेक कहलर ने साफ किया है कि जिन आवेदकों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाता है या राष्ट्रीय हित में है, वे अमेरिका में रहकर ही अपनी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं. आर्थिक लाभ या राष्ट्रीय महत्व के मामलों में यह विशेष छूट दी जा सकती है. हालांकि, बाकी मामलों में लोगों को अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर विदेश (अपने गृह देश) से आवेदन करने के लिए कहा जा सकता है. इस नए बयान से भारतीय समुदाय ने कुछ राहत की सांस ली है.
भारतीय पेशेवरों पर इसका क्या असर होगा?

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अमेरिका में एच-1बी वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है. वित्तीय वर्ष 2025 में मंजूर हुए कुल 4 लाख से अधिक एच-1बी वीजा में से लगभग 2.83 लाख वीजा भारतीयों को मिले थे. ये लोग सालों से अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड बैकलॉग की वजह से लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. पहले वे 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' के तहत अमेरिका में रहते हुए ही आवेदन कर पाते थे. अब नए नियम के बाद जो लोग अपना आर्थिक योगदान साबित कर पाएंगे, उन्हें तो राहत मिल जाएगी, लेकिन पूरी तरह से स्पष्ट गाइडलाइंस न होने के कारण अभी भी थोड़ी उलझन बनी हुई है.
भारतीयों से भारत लौटने की अपील

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इस बीच, जोहो (Zoho) के प्रमुख श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया पर भारतीयों से भारत लौटने की अपील की, जिस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं. कई टेक पेशेवरों का कहना है कि सालों की मेहनत और वहां बसे परिवार को अचानक छोड़ना आसान नहीं है. दूसरी तरफ, मेटा और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों में हो रही छंटनी ने एच-1बी कर्मचारियों पर दबाव वैसे ही बढ़ा रखा है, क्योंकि नौकरी जाने के 60 दिनों के भीतर उन्हें नई नौकरी ढूंढनी होती है. बहरहाल, अमेरिकी प्रशासन के ताजा बयान से उम्मीद तो जगी है, लेकिन स्थिति पूरी तरह साफ होना अभी बाकी है.