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Petrol, Diesel Prices: भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम चार साल बाद बढ़े हैं. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से कई सप्ताह तक पेट्रोल पंपों में भीड़ देखने को मिली. अब सवाल यह है कि यह 3 रुपये की बढ़ोतरी क्या उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ेगी? इस पर विशेषज्ञों ने सहमति जताई है.
11 रुपये और बढ़ने चाहिए दाम

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पेट्रोल और डीजल के दामों में तीन रुपए की वृद्धि मामूली है, विशेषज्ञ मानते हैं कि कम से कम 11 रुपये की और वृद्धि की आवश्यकता है. मिडिल ईस्ट में जंग और होर्मुज पर फंसे जहाजों के चलते ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 14-15 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि तर्कसंगत है.
तेल कंपनियों की राहत बेहद सीमित

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और कॉर्पोरेट रेटिंग के सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, "पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की मामूली वृद्धि से तेल कंपनियों को सीमित राहत मिली है. पिछले दो महीने से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारत में तेल की कीमतें न बढ़ने के कारण तेल कंपनियों को (ओएमसी) को प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
3 रुपये की बढ़ोतरी तो बस शुरुआत

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हार्वर्ड से स्नातक और अमेरिका स्थित कंसल्टिंग फर्म ZS के पार्टनर विनीत के एक्स पर शेयर की पोस्ट में लिखा कि 3 रुपये की बढ़ोतरी तो बस शुरुआत है. समय के साथ तेल की कीमतों में कुल मिलाकर 20-25 रुपये तक इजाफा होगा. तेल और गैस कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं, और इस नुकसान को लंबे समय तक सहन करना संभव नहीं होगा.
70 से 107.63 डॉलर तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड का भाव

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ब्रेंट क्रूड के एक बैरल का भाव ईरान वार से पहले 1 फरवरी, 2026 को 70 डॉलर प्रति बैरल था, जोकि आज लगभग 107.63 डॉलर है. इस बढ़ोतरी को देखते हुए अमेरिका और चीन समेत अधिकांश देशों ने मोटर ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं. अगर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं तो भारत में भी तेल कंपनियों को खुदरा कीमतों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता होगी.
भारत में स्थिर थीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें

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भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी ईंधन की कीमतें बढ़ाई हैं. भारत में केंद्र सरकार तेल और डीजल कंपनियों के माध्यम से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हस्तक्षेप करती है, इसलिए अब तक कीमतें स्थिर रखी गई थीं, लेकिन प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को पूरी तरह फायदा नहीं होने वाला है.