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Gold Jewellery Purity: सोने के आभूषणों पर गुदे हुए 916, 750 और 585 जैसे नंबर असल में उसकी शुद्धता को दर्शाते हैं। इन्हें 'हॉलमार्क नंबर' या 'फाइननेस' कहा जाता है। इन नंबरों का सीधा सा मतलब यह होता है कि प्रति 1,000 ग्राम (या हिस्सों) में से कितना हिस्सा शुद्ध सोने का है। आइए आसान शब्दों में इनका मतलब समझते हैं:
नंबर 916 का मतलब (22 कैरेट गोल्ड)

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शुद्धता: 91.6% शुद्ध सोना। अगर आपकी ज्वेलरी पर 916 लिखा है, तो इसका मतलब है कि उसमें 91.6% असली सोना है और बाकी बचा हुआ 8.4% हिस्सा तांबा, चांदी या जिंक जैसी अन्य धातुओं का मिश्रण है। भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में पारंपरिक और भारी आभूषण बनाने के लिए सबसे ज्यादा इसी 22 कैरेट (916) सोने का इस्तेमाल किया जाता है।
नंबर 750 का मतलब (18 कैरेट गोल्ड)

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अगर आपकी ज्वेलरी पर 750 लिखा है तो इसका मतलब है कि इस आभूषण में 75% शुद्ध सोना होता है और बाकी 25% हिस्सा दूसरी धातुओं का होता है। 18 कैरेट सोना 22 कैरेट के मुकाबले ज्यादा मजबूत होता है। इसलिए इसका इस्तेमाल ज्यादातर हीरे या अन्य कीमती रत्न जड़े हुए आभूषणों, अंगूठियों और रोजाना पहनने वाली ज्वेलरी में किया जाता है।
नंबर 585 का मतलब (14 कैरेट गोल्ड)

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इसमें शुद्ध सोने की मात्रा 58.5% होती है और बाकी 41.5% हिस्सा अन्य धातुओं का होता है। यह सोना काफी मजबूत और टिकाऊ होता है और इस पर खरोंच आसानी से नहीं लगतीं। इसका इस्तेमाल कम बजट वाली ज्वेलरी और पश्चिमी देशों में काफी ज्यादा होता है।
शुद्धता का यह गणित क्यों जरूरी है?

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24 कैरेट (999) सोना 99.9% शुद्ध होता है, लेकिन वह इतना मुलायम (Soft) होता है कि उससे रोजाना पहनने वाले गहने नहीं बनाए जा सकते। गहनों को मजबूती और सही आकार देने के लिए ही सोने में दूसरी धातुएं मिलाना जरूरी होता है।
भारत में हॉलमार्किंग के नए नियम

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भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के अनुसार, अब असली हॉलमार्क वाली ज्वेलरी पर तीन जरूरी निशान होते हैं, जिन्हें देखकर आप सोने की शुद्धता जांच सकते हैं। गहने खरीदते समय हमेशा इन नंबरों और हॉलमार्क के निशानों को ध्यान से देखें, ताकि आपको सही कीमत पर सही शुद्धता का सोना मिल सके।