
1 / 9
क्या आपने कभी सोचा है कि AI से पूछा गया एक छोटा सा सवाल भी पर्यावरण पर असर डाल सकता है? हर प्रॉम्प्ट के पीछे डेटा सेंटरों की भारी ऊर्जा और पानी की खपत छिपी होती है, जो धीरे-धीरे धरती पर दबाव बढ़ा रही है.
AI का बढ़ता इस्तेमाल और उसकी असली कीमत

2 / 9
आज के डिजिटल दौर में AI टूल्स जैसे चैटबॉट, इमेज जनरेटर और वॉयस असिस्टेंट हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. हम बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हर बार जब हम कोई सवाल पूछते हैं या कमांड देते हैं, तो इसके पीछे बड़े डेटा सेंटर एक्टिव हो जाते हैं. इन डेटा सेंटरों में हजारों सर्वर एक साथ काम करते हैं, जो जानकारी को प्रोसेस करके हमें जवाब देते हैं. इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है. यही वजह है कि AI का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, उतनी ही इसकी 'छुपी हुई लागत' भी बढ़ रही है.
एक AI प्रॉम्प्ट में कितना पानी खर्च होता है?

3 / 9
आपको जानकर हैरानी होगी कि AI से पूछे गए एक साधारण सवाल के पीछे भी पानी की खपत होती है. दरअसल, डेटा सेंटरों के सर्वर बहुत गर्म हो जाते हैं और उन्हें ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. रिसर्च के मुताबिक, लगभग 100 शब्दों का एक AI प्रॉम्प्ट करीब 500 मिलीलीटर पानी की खपत कर सकता है. यह सुनने में कम लग सकता है, लेकिन जब लाखों-करोड़ों लोग हर दिन AI का इस्तेमाल करते हैं, तो यह आंकड़ा बेहद बड़ा हो जाता है. इससे पानी जैसे कीमती संसाधन पर दबाव बढ़ रहा है.
डेटा सेंटर बना रहे हैं “हीट आइलैंड”

4 / 9
AI को सपोर्ट करने वाले डेटा सेंटर सिर्फ बिजली और पानी ही नहीं खपत करते, बल्कि वे आसपास के तापमान पर भी असर डालते हैं. वैज्ञानिकों ने पाया है कि ये सेंटर “हीट आइलैंड” का रूप ले सकते हैं. इसका मतलब है कि जहां ये सेंटर मौजूद होते हैं, वहां का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हो जाता है. कुछ स्टडीज में ये बढ़ोतरी औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक देखी गई है, जबकि कुछ जगहों पर यह 9 डिग्री तक भी पहुंच सकती है. इससे स्थानीय मौसम, खेती और लोगों की सेहत पर असर पड़ सकता है.
करोड़ों लोगों पर पड़ रहा असर

5 / 9
डेटा सेंटरों का असर सिर्फ उनके आसपास तक सीमित नहीं रहता. रिसर्च के मुताबिक, इनका असर 10 किलोमीटर तक के इलाके में महसूस किया जा सकता है. इसका मतलब है कि दुनिया भर में करीब 34 करोड़ लोग इस तापमान बढ़ोतरी और पर्यावरणीय बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं. खासकर शहरी इलाकों में, जहां पहले से ही प्रदूषण और गर्मी ज्यादा होती है, वहां यह समस्या और गंभीर बन सकती है.
बिजली की बढ़ती मांग

6 / 9
AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण डेटा सेंटरों की बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. हर AI क्वेरी, हर इमेज जनरेशन और हर वीडियो प्रोसेसिंग में सर्वरों को लगातार काम करना पड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर दुनिया की कुल बिजली खपत का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं. इससे बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ेगा और अगर यह ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से नहीं आई, तो कार्बन उत्सर्जन भी तेजी से बढ़ सकता है.
पानी और ऊर्जा-दोनों पर खतरा

7 / 9
डेटा सेंटरों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे एक साथ दो महत्वपूर्ण संसाधनों—पानी और बिजली—दोनों पर दबाव डालते हैं. मध्यम आकार के डेटा सेंटर साल में करोड़ों लीटर पानी इस्तेमाल करते हैं, जबकि बड़े डेटा सेंटर रोजाना लाखों गैलन पानी खर्च कर सकते हैं. यह खासतौर पर उन इलाकों के लिए खतरे की घंटी है जहां पहले से ही पानी की कमी है. ऐसे में AI का बढ़ता इस्तेमाल इन समस्याओं को और गंभीर बना सकता है.
पर्यावरण पर बढ़ता खतरा

8 / 9
AI का तेजी से विस्तार पर्यावरण के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है. बढ़ती ऊर्जा खपत का मतलब है ज्यादा कार्बन एमीशन, जो ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ावा देता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों को कमजोर कर सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि AI इंडस्ट्री को अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे.
क्या हैं संभावित समाधान?

9 / 9
इस समस्या का समाधान पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए सही दिशा में काम करना जरूरी है. डेटा सेंटरों को ग्रीन एनर्जी (जैसे सोलर और विंड पावर) से चलाया जा सकता है. इसके अलावा, एडवांस कूलिंग टेक्नोलॉजी जैसे लिक्विड कूलिंग का इस्तेमाल करके पानी की खपत कम की जा सकती है. सरकार और कंपनियों को मिलकर ऐसे नियम बनाने होंगे, जिनसे डेटा सेंटर अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बन सकें. AI के उपयोग में सिर्फ कंपनियों की ही नहीं, बल्कि यूज़र्स की भी जिम्मेदारी है. हमें यह समझना होगा कि हर बार जब हम AI का उपयोग करते हैं, तो उसके पीछे संसाधनों की खपत होती है. इसलिए जरूरत है कि हम इसका उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक इस्तेमाल से बचें.
(All Photos Credit: AI)