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ट्रेन यात्रा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए ऐसी सुविधाएं दी हैं, जिनकी मदद से तुरंत डॉक्टर और मेडिकल हेल्प मिल सकती है.
ट्रेन यात्रा में मेडिकल इमरजेंसी

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ट्रेन से सफर करते समय कई बार अचानक तबीयत बिगड़ जाती है, जैसे चक्कर आना, उल्टी, बुखार या सीने में दर्द. ऐसे समय में ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं, लेकिन भारतीय रेलवे ने इसके लिए पहले से ही मजबूत सिस्टम बना रखा है. जरूरत है सिर्फ सही जानकारी की, ताकि समय रहते मदद मिल सके.
सबसे पहले TTE को दें जानकारी

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अगर किसी यात्री की तबीयत खराब होती है, तो सबसे पहला कदम होता है ट्रेन के TTE (टिकट चेकर) को तुरंत सूचित करना. TTE तुरंत कंट्रोल रूम से संपर्क करता है और मेडिकल इमरजेंसी की सूचना देता है, जिससे आगे की मदद तेजी से शुरू हो जाती है
अगले स्टेशन पर मिलता है डॉक्टर

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जैसे ही ट्रेन अगले स्टेशन पर पहुंचती है, वहां पहले से डॉक्टर और मेडिकल टीम तैयार रहती है. डॉक्टर प्लेटफॉर्म पर ही मरीज का इलाज करता है और जरूरत पड़ने पर ट्रेन में चढ़कर भी शुरुआती इलाज देता है. इससे मरीज को तुरंत राहत मिलती है.
मामूली बीमारी में तुरंत राहत

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हर हालात में डॉक्टर की जरूरत नहीं होती. अगर समस्या हल्की है, जैसे सिरदर्द, बुखार या उल्टी, तो ट्रेन में मौजूद गार्ड के पास मेडिकल किट होती है. इसमें बेसिक दवाइयां होती हैं, जिससे तुरंत राहत दी जा सकती है.
फ्री में मिलती है बेसिक दवा

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रेलवे यात्रियों को प्राथमिक इलाज के तहत एक डोज दवा मुफ्त देता है. यानी छोटी-मोटी परेशानी में आपको पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती. ये सुविधा लगभग सभी ट्रेनों में उपलब्ध रहती है.
हेल्पलाइन नंबर 139 सबसे जरूरी

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अगर TTE आसपास ना मिले या तुरंत मदद चाहिए, तो आप रेलवे की 24×7 हेल्पलाइन 139 पर कॉल कर सकते हैं. यहां अपनी ट्रेन, कोच और सीट नंबर बताने पर तुरंत कंट्रोल रूम को सूचना भेज दी जाती है और अगले स्टेशन पर मदद तैयार कर दी जाती है.
रेलवे स्टाफ होता है एक्सपर्ट

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रेलवे का फ्रंटलाइन स्टाफ जैसे TTE, गार्ड और स्टेशन मास्टर फर्सट ऐड देने के लिए प्रशिक्षित होते हैं. इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर अस्पतालों और डॉक्टरों की लिस्ट भी उपलब्ध रहती है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिलती है.
(All Photos Credit: Social Media)