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अफ्रीका महाद्वीप के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटें बहुत तेजी से एक-दूसरे से दूर खिसक रही हैं जिससे वैज्ञानिकों ने धरती के फटने का अंदेशा जताया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस हलचल की वजह से भविष्य में अफ्रीका दो हिस्सों में बंट सकता है और दुनिया का नक्शा हमेशा के लिए बदल जाएगा.
कितनी है रफ्तार?

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अफ्रीकी और सोमाली टेक्टोनिक प्लेटें हर साल करीब 0.8 सेंटीमीटर की रफ्तार से अलग हो रही हैं जिससे पूर्वी अफ्रीका की जमीन कमजोर पड़ रही है. पहले माना जा रहा था कि इस प्रक्रिया में करोड़ों साल लगेंगे लेकिन अब वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव 10 लाख साल से भी कम समय में पूरा हो सकता है.
कहां दिखी दरार?

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इथियोपिया के अफार क्षेत्र में 60 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर गहरी एक विशाल दरार पहले ही बन चुकी है जो भविष्य के बड़े खतरे का संकेत दे रही है. साल 2005 में आए 420 से ज्यादा भूकंपों के कारण यह जमीन कुछ ही दिनों में फट गई थी जिसे देखकर विशेषज्ञ भी हैरान रह गए थे.
नया महासागर बनेगा?

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वैज्ञानिकों का दावा है कि इस बढ़ती दरार की वजह से एक नया महासागर जन्म लेगा जो पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों को मुख्य महाद्वीप से पूरी तरह अलग कर देगा. समुद्र का पानी इस खाली जगह में भरने लगेगा जिससे एक नया जलीय क्षेत्र बनेगा और पृथ्वी के भूगोल में ऐतिहासिक बदलाव आएगा.
किसे होगा फायदा?

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इस प्राकृतिक बदलाव के कारण जांबिया और युगांडा जैसे देश जो अभी चारों तरफ से जमीन से घिरे हैं वे भविष्य में समुद्र के किनारे स्थित हो जाएंगे. हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान कुछ छोटे द्वीपीय देश समुद्र के बढ़ते जलस्तर की वजह से पूरी तरह पानी में समा सकते हैं जिससे बड़ी तबाही होगी.
क्या होगा असर?

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नया महासागर बनने से न केवल अफ्रीका बल्कि पूरी दुनिया के इकोसिस्टम और जलवायु पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा जिससे प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बढ़ जाएगी. वैज्ञानिकों की चिंता इस बात को लेकर ज्यादा है कि यह बदलाव अनुमान से कहीं अधिक तेजी से हो रहा है जो इंसानी बस्तियों के लिए चुनौती है.
क्या है भविष्य?

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धरती के भीतर हो रही इस उथल-पुथल ने विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है क्योंकि यह प्राकृतिक घटना कई देशों के अस्तित्व को मिटा सकती है. हालांकि यह प्रक्रिया धीमी है लेकिन इसके परिणाम इतने भयानक होंगे कि भविष्य में अफ्रीका महाद्वीप दो अलग-अलग जमीनी टुकड़ों के रूप में पहचाना जाएगा.