क्या होगा अगर अंतरिक्ष में बह गए हमारे आंसू? अंजाम सोच भी नहीं सकते आप

क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष की जीरो ग्रेविटी में रोना कितना भारी पड़ सकता है? वहां आंखों से निकलने वाले आंसू गालों पर गिरने के बजाय जानलेवा खतरा कैसे बन जाते हैं?

What Happens to Tears in Space (5) (1)
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आंसू क्यों नहीं गिरते?

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धरती पर ग्रेविटी आंसुओं को आंखों से खींचकर गालों के नीचे ले आती है लेकिन स्पेस के जीरो ग्रेविटी माहौल में सब कुछ तैरता रहता है. वहां आंसू आंखों से निकलकर नीचे गिरने के बजाय वहीं चिपक जाते हैं और एक छोटे तरल बुलबुले की तरह बनने लगते हैं.

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क्या है खतरा?

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अंतरिक्ष यात्री क्रिस हैडफील्ड के मुताबिक वहां आंसू आंखों से नहीं गिरते बल्कि पूरी आंख को ढक लेते हैं जिससे सब कुछ धुंधला दिखने लगता है. अगर यह पानी का बुलबुला ज्यादा बड़ा हो जाए तो यह नाक तक पहुंच सकता है और सांस लेने में भी दिक्कत पैदा कर सकता है.

कैसे हटाते हैं?

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चूंकि आंसू अपने आप नहीं गिरते इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को इन आंसुओं के बुलबुलों को तौलिए या हाथ से मैनुअली पोंछना पड़ता है. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो आंसुओं में मौजूद नमक आंखों में तेज जलन पैदा करेगा और यह पानी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को भी खराब कर सकता है.

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पसीना भी समस्या?

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सिर्फ आंसू ही नहीं बल्कि पसीना भी अंतरिक्ष में एक बड़ी समस्या है क्योंकि वह भी शरीर से नीचे नहीं टपकता है. पसीना त्वचा पर एक गीली चादर की तरह चिपक जाता है जिसे लगातार पोंछना पड़ता है वरना यह आंखों और कान के अंदर घुसकर परेशानी खड़ी कर सकता है.

कैसा है अनुभव?

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अंतरिक्ष में इंसान का शरीर वही रहता है लेकिन वहां का अनोखा वातावरण भावनाओं को व्यक्त करने का तरीका पूरी तरह बदल देता है. वहां रोना सिर्फ एक अहसास नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक चुनौती है जिसे पार करना हर अंतरिक्ष यात्री के लिए सुरक्षा का बड़ा हिस्सा होता है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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