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ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच भारत के लिए राजस्थान के थार रेगिस्तान से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जैसलमेर के बाघेवाला क्षेत्र में कच्चे तेल का अब तक का रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन दर्ज करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है.
कितना बढ़ा है उत्पादन?

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ईटी की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर अब 1,202 बैरल प्रतिदिन कर दिया है जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. यह पिछले साल के 705 बैरल के मुकाबले लगभग 70 प्रतिशत की भारी बढ़त है जो भारत की ऊर्जा शक्ति को और मजबूत करेगी.
कैसे पहुंचता है रिफाइनरी?

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जैसलमेर से निकलने वाला यह तेल पहले टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा भेजा जाता है जहां ओएनजीसी की मदद से इसे आगे बढ़ाया जाता है. वहां से पाइपलाइन के जरिए यह तेल इंडियन ऑयल की कोयली रिफाइनरी तक पहुंचता है ताकि इसे इस्तेमाल के लायक साफ और शुद्ध किया जा सके.
क्या कहते हैं आंकड़े?

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वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान तेल का कुल उत्पादन 43,773 टन तक पहुंच गया है जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज 32,787 टन ही दर्ज हुआ था. यह लगातार बढ़ता हुआ ग्राफ दिखाता है कि आने वाले समय में भारत अपनी तेल की जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में बढ़ रहा है.
क्या थी सबसे बड़ी चुनौती?

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बीकानेर-नागौर बेसिन का यह इलाका बहुत गाढ़े तेल के लिए जाना जाता है जहां पुराने और पारंपरिक तरीकों से तेल निकालना लगभग नामुमकिन काम था. कंपनी ने 13 नए कुएं खोदकर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके इस मुश्किल चुनौती को एक बड़ी सफलता में बदल दिया है.
क्या आयात होगा खत्म?

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भारत सरकार की यह कोशिश अब रंग लाती दिख रही है जिससे विदेशों से तेल मंगवाने की मजबूरी और भारी भरकम खर्च को कम किया जा सकेगा. रेगिस्तान से निकलने वाला यह तेल न केवल देश की जरूरतें पूरी करेगा बल्कि मुश्किल वक्त में भारत की अर्थव्यवस्था को भी सहारा देगा.