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Highway vs Expressway: हाईवे और एक्सप्रेसवे दोनों ही सड़कें हैं, लेकिन इनके बीच बड़ा फर्क होता है. एक्सप्रेसवे जहां तेज और सुरक्षित यात्रा के लिए बनाए जाते हैं, वहीं हाईवे नॉर्मल ट्रेवल के लिए होते हैं. जानिए दोनों में क्या अंतर है और स्पीड लिमिट क्या होती है.
क्या होता है हाईवे और एक्सप्रेसवे?

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हाईवे और एक्सप्रेसवे दोनों लंबी दूरी तय करने के लिए बनाई गई सड़कें हैं. लेकिन इनके डिजाइन, नियम और इस्तेमाल में बड़ा अंतर होता है. एक्सप्रेसवे हाईवे का एड्वांस रूप माना जाता है, जहां ट्रैफिक ज्यादा तेज और नियंत्रित होता है.
हाईवे क्या होता है?

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हाईवे वो सड़क होती है जो शहरों, कस्बों और राज्यों को जोड़ती है. इन पर कई जगह क्रॉस रोड, ट्रैफिक सिग्नल और लोकल एंट्री होती है. आमतौर पर हाईवे 2 से 4 लेन के होते हैं और इन पर ट्रैफिक मिक्स होता है.
एक्सप्रेसवे क्या है?

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एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड, एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क होती है. यहां वाहनों की एंट्री और एग्जिट सिर्फ तय जगहों से होता है. ये 6 से 8 लेन के होते हैं और बीच में डिवाइडर, सर्विस रोड जैसी सुविधाएं होती हैं. हाईवे पर कई जगह से गाड़ियां आ-जा सकती हैं, जिससे ट्रैफिक और दुर्घटना के चांस बढ़ते हैं. वहीं एक्सप्रेसवे पर सीमित एंट्री/एग्जिट होते हैं, जिससे यात्रा सुरक्षित और तेज होती है.
लेन और डिजाइन में अंतर

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हाईवे आमतौर पर 2-4 लेन के होते हैं, जबकि एक्सप्रेसवे 6-8 लेन के होते हैं. एक्सप्रेसवे का डिजाइन सीधा और स्मूद होता है, जिससे वाहन बिना रुकावट के चल सकते हैं. भारत में हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड लिमिट आमतौर पर 80-100 किमी/घंटा होती है. वहीं एक्सप्रेसवे पर ये सीमा 100-120 किमी/घंटा तक हो सकती है, जिससे यात्रा तेज होती है.
सुरक्षा और दुर्घटना

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एक्सप्रेसवे पर कम क्रॉसिंग और नियंत्रित एंट्री होने के कारण दुर्घटनाएं कम होती हैं. हाईवे पर ज्यादा ट्रैफिक और क्रॉस रोड होने से जोखिम ज्यादा होता है. वहीं, एक्सप्रेसवे पर टोल ज्यादा हो सकता है, लेकिन यात्रा तेज, स्मूद और आरामदायक होती है. हाईवे पर टोल कम होता है, लेकिन ट्रैफिक और रुकावट ज्यादा मिल सकती है.
(All Photos Credit: Freepik)