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Temples of India: भारत को आस्था और विविधता का देश कहा जाता है. यहां हर राज्य, हर शहर और हर गली में भक्ति का अपना अलग रंग दिखता है. आमतौर पर मंदिरों में देवी देवताओं को लड्डू, हलवा, खीर या फल का भोग लगाया जाता है. लेकिन देश में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहां भोग की परंपरा बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली है. कहीं नूडल्स और मंचूरियन चढ़ते हैं, तो कहीं चॉकलेट, जैम और पापड़. आइए जानते हैं, ये मंदिर देश में कहां स्थित हैं?

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चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता - पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित चाइनीज काली मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है. यहां मां काली को नूडल्स, फ्राइड राइस और मंचूरियन का भोग लगाया जाता है. बताया जाता है कि इस इलाके में रहने वाले चीनी समुदाय ने अपनी भोजन संस्कृति के अनुसार यह परंपरा शुरू की. यहां ये भोग पूरी श्रद्धा से बनाए जाते हैं और बाद में प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं.

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चॉकलेट गणेश मंदिर, बेंगलुरु - कर्नाटक के बेंगलुरु में मंचनबेले महागणपति मंदिर बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय है. यहां भगवान गणेश को चॉकलेट का भोग लगाया जाता है. खासकर किट कैट जैसी चॉकलेट चढ़ाई जाती हैं. स्थानीय मान्यता है कि बच्चों की खुशी और उनकी मासूम आस्था को देखते हुए यह परंपरा शुरू हुई. इससे बच्चे मंदिर से जुड़ते हैं और भक्ति को खुशी के साथ अपनाते हैं.

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मुरुगन मंदिर, पलानी - तमिलनाडु के पलानी मुरुगन मंदिर में पारंपरिक पंचामृतम के साथ कई बार आधुनिक मिठाइयों और फलों के जैम का भी भोग लगाया जाता है. यह पूरी तरह भक्तों की श्रद्धा और इच्छा पर निर्भर करता है. मंदिर प्रशासन का मानना है कि भक्ति भाव सबसे अहम है, भोग का रूप नहीं.

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मंच मुरुगन मंदिर, अलेप्पी - केरल के अलेप्पी क्षेत्र में भगवान मुरुगन के बालरूप को चॉकलेट का भोग चढ़ाया जाता है. खास बात यह है कि उन्हें चॉकलेट की माला, विशेष कर मंच (Munch) चॉकलेट की माला भी पहनाई जाती है. यह परंपरा नई पीढ़ी को मंदिर से जोड़ने का एक प्रयास मानी जाती है. त्योहारों के समय यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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जयपुर के पापड़वाले हनुमान जी - राजस्थान की राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर में स्थित हनुमान जी का मंदिर पापड़ के भोग के लिए मशहूर है. यहां हनुमान जी को विशेष रूप से पापड़ चढ़ाए जाते हैं. दर्शन के बाद भक्त इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है और श्रद्धा से जुड़ी हुई है.