प्लेऑफ का स्ट्रकचर टॉप 2 टीमों को फाइनल में पहुंचने के लिए 2 मौके देकर एक एक्सट्रा फायदा देता है. भले ही कोई टीम क्वालिफायर-1 हार जाए, उसे क्वालिफायर-2 के ज़रिए एक और मौका मिलता है, जिससे स्टैंडिंग में नीचे रहने वाली टीमों की तुलना में उनका रास्ता काफी आसान हो जाता है.

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ऐतिहासिक रूप से, ये फायदा ट्रॉफी में कंवर्ट है. आईपीएल के इतिहास में खेले गए 15 क्वालिफायर-1 मैचों में से, जीतने वाली टीम 12 बार चैंपियन बनी है. ये आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि प्रेशर सिचुएशन में मोमेंटम और फाइनल के लिए डायरेक्ट क्वालिफिकेशन कितना जरूरी हो सकता है.

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सिर्फ 3 टीमें ही क्वालिफायर-1 हारने या टॉप 2 से बाहर रहने के बाद IPL का खिताब जीतने में कामयाब रही हैं. मुंबई इंडियंस ने आईपीएल 2013 और आईपीएल 2017 में यह कारनामा किया, जबकि सनराइज़र्स हैदराबाद ने आईपीएल 2016 में एलिमिनेटर और क्वालिफायर-2 से जूझते हुए मशहूर तौर पर ट्रॉफी अपने नाम की थी.

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दिलचस्प बात ये है कि हाल के सालों में ये ट्रेंड और भी मजबूत हुआ है. पिछले 8 आईपीएल सीजन में, क्वालिफायर-1 जीतने वाली हर टीम ने आखिरकार चैंपियन के तौर पर अपना अभियान खत्म किया है. फाइनल से पहले मिलने वाले एक्ट्रा रिकवरी टाइम ने अक्सर कंसिस्टेंसी मेंटेन रखने में अहम रोल अदा किया है.

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आरसीबी इस ट्रेंड को जारी रखने वाली सबसे फ्रेश टीम थी, जिसने आईपीएल 2025 के दौरान क्वालिफायर-1 जीता और आखिरकार अपनी पहली आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की. उनकी जबरदस्त परफॉर्मेंस ने लीग टेबल में टॉप 2 में जगह बनाने के अहमियत को और भी मजबूत किया.

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अब बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में आईपीएल 2026 के क्वालिफायर-1 मुक़ाबले में आमने-सामने होंगे. जीतने वाली टीम सीधे नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले फाइनल के लिए क्वालिफाई करेगी, जिससे क्वालिफायर-1 की कामयाबी से जुड़ा ऐतिहासिक ट्रेंड जिंदा रहेगा.