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Shyam Singha Roy Movie: कुछ फिल्में आपके होश उड़ा सकती हैं. समाज की ऐसी कुप्रथा, जिसने लड़कियों को सभ्यता के नाम पर बंदी बना रखा था. साउथ सुपरस्टार नानी और एक्ट्रेस साई पल्लवी की ये फिल्म उन सभी दकियानूसी विचारधारओं के खिलाफ एक आवाज है.

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फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं देतीं, कभी-कभी वे समाज के छिपे हुए सच को भी उजागर करती हैं. साउथ सिनेमा की ऐसी ही एक फिल्म, जिसने देव दासी प्रथा का काला सच बाहर निकाला. जिसने बताया कि इसमें महिलाओं को कितना कुछ झेलना पड़ता है.

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श्याम सिंघा रॉय ऐसी ही एक तेलुगु फिल्म है, जिसने 7.6 की IMDb रेटिंग हासिल की है. यह फिल्म दो समय की कहानियों को जोड़ती है और देवदासी प्रथा के काले सच को बेनकाब करती है. आइए जानते हैं.

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फिल्म में नानी दो भूमिकाओं में नजर आते हैं. एक तरफ वर्तमान समय में वासुदेव नाम का फिल्म निर्देशक है, जो अपनी फिल्म के प्लॉट पर चोरी का आरोप झेलता है. जांच के दौरान उसे पता चलता है कि उसकी कहानी पुराने लेखक श्याम सिंघा रॉय की किताब से मिलती-जुलती है.

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फिर कहानी 1960-70 के दशक में चली जाती है, जहां श्याम सिंघा रॉय एक क्रांतिकारी लेखक और समाज सुधारक हैं. वे अस्पृश्यता और अन्याय के खिलाफ लड़ते हैं. वे एक गांव में काली मंदिर जाते हैं, जहां देवदासी मैत्रेयी (साई पल्लवी) नृत्य करती है. श्याम उससे प्यार कर लेते हैं और उसे रोसी नाम देते हैं.

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साई पल्लवी का देवी रूप इतना मोहक है कि एक बार देखने पर दोबारा नजर हटाने का मन नहीं करेगा. बता दें कि देवदासी प्रथा पुरानी प्रथा है, जिसमें छोटी लड़कियों को मंदिर में समर्पित कर दिया जाता था. समाज उन्हें देवता की सेवा का नाम देकर उनका शोषण करता था. मंदिर के पुजारी और बड़े लोग उनका यौन शोषण करते थे.

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फिल्म में यह दिखाया गया है कि कैसे रोसी जैसी लड़कियां इस प्रथा के शिकार होती हैं. श्याम सिंघा रॉय रोसी को इस बंधन से मुक्त कराने के लिए लड़ते हैं. एक दृश्य में वे मंदिर के महंत से लड़ते हैं और उसे सजा देते हैं.

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यह दृश्य बहुत प्रभावशाली है, जो प्रथा के काले सच को सामने लाता है. फिल्म बताती है कि कैसे सगे-संबंधी और समाज के लोग ही महिलाओं के लिए काल बन जाते हैं. श्याम और रोसी भागकर कोलकाता जाते हैं. श्याम लेखक बनते हैं और देवदासियों की मदद के लिए ट्रस्ट बनाते हैं. लेकिन तभी कहानी में ट्विस्ट आता है, जब श्याम के सगे भाई उनकी हत्या कर देते हैं.

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फिल्म में रोमांस के साथ-साथ सामाजिक मुद्दे जैसे अस्पृश्यता और सम्मान हत्या भी दिखाए गए हैं. साई पल्लवी का नृत्य और अभिनय कमाल का है. वे देवदासी की पीड़ा और मजबूती दोनों को बखूबी निभाती हैं. श्याम सिंघा रॉय सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है. यह समाज के उस चेहरे को दिखाती है, जो बाहर से सभ्य दिखता है लेकिन अंदर से काला है.

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निर्देशक राहुल सांकृत्यन ने कहानी को अच्छे से बुना है. संगीत, सिनेमैटोग्राफी और एक्टिंग सब शानदार हैं. यह फिल्म हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज भी कई जगहों पर ऐसी प्रथाएं छिपी हुई हैं. फिल्म को आज भी अपने क्लास और स्टोरी टेलिंग के लिए जाना जाता है.