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Tilak Lagane Ka Tarika: क्या आप जानते हैं कि तिलक लगाने की उंगली भी उसके असर को बदल सकती है? पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार हर उंगली का अलग महत्व है, जो आपकी सोच, आत्मविश्वास और ऊर्जा पर प्रभाव डाल सकता है। पढ़ें यह आर्टिकल और जानें, क्या आप सही तरीके से तिलक लगाते हैं?
तिलक लगाने का सही तरीका

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Tilak Lagane Ka Tarika: सुबह की पूजा हो या किसी नए काम की शुरुआत, माथे पर तिलक लगाना भारतीय जीवनशैली का अहम हिस्सा है। अक्सर इसे केवल आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में इसका एक गहरा मनोवैज्ञानिक और प्रतीकात्मक अर्थ भी बताया गया है। खास बात यह है कि तिलक लगाने में इस्तेमाल की जाने वाली उंगली भी इसके प्रभाव को अलग बना सकती है।
उंगलियां और उनका महत्व

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भारतीय परंपरा में हर उंगली को एक विशेष ग्रह और तत्व से जोड़ा गया है। यह केवल धार्मिक सोच नहीं है, बल्कि व्यवहार और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा माना जाता है। इसलिए तिलक लगाते समय उंगली का चयन एक छोटा लेकिन अहम पहलू बन जाता है।
तर्जनी उंगली: फैसलों में स्पष्टता

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तर्जनी उंगली को दिशा दिखाने वाली उंगली माना जाता है। इसे गुरु तत्व से जोड़ा जाता है। इस उंगली से चंदन या सिंदूर का तिलक लगाने से आत्मविश्वास बढ़ने की बात कही जाती है। कई लोग इंटरव्यू या महत्वपूर्ण मीटिंग से पहले यही तरीका अपनाते हैं।
मध्य उंगली: संतुलन का संकेत

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मध्य उंगली का संबंध शनि से जोड़ा जाता है। यह अनुशासन और स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है। भस्म या विभूति से तिलक लगाने पर मन को शांत रखने में मदद मिलती है, ऐसा विश्वास है। तनाव भरे दिन में यह तरीका मानसिक संतुलन बनाने में सहायक माना जाता है।
अनामिका उंगली: सकारात्मक ऊर्जा

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अनामिका उंगली को शुभ कार्यों के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। यह शुक्र ग्रह से जुड़ी होती है, जो आकर्षण और सौंदर्य का प्रतीक है। हल्दी या केसर का तिलक इस उंगली से लगाने पर आत्मविश्वास और सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।
छोटी उंगली: संवाद और समझ

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छोटी उंगली बुध ग्रह से जुड़ी होती है। यह संचार और बुद्धिमत्ता का प्रतीक मानी जाती है। चंदन या तुलसी के रस से तिलक लगाने पर संवाद कौशल बेहतर होने की बात कही जाती है। आज के दौर में यह पहलू खास अहम माना जा रहा है।
तिलक लगाने का सही तरीका

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केवल उंगली ही नहीं, तरीका भी मायने रखता है। तिलक को हल्के गोल घुमाव में माथे के बीच लगाना बेहतर माना जाता है। यह स्थान ध्यान और एकाग्रता से जुड़ा माना जाता है। कुछ लोग इसे दिन की शुरुआत को केंद्रित बनाने वाला अभ्यास मानते हैं।