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Solar Eclipse India Aditya L1 Satellite: सूर्य ग्रहण पर भारत का आदित्य- L1 सेटेलाइट बहुत ही महत्वपूर्ण साबित होने वाला है. ISRO का यह आदित्य L-1 ग्रहण की स्पष्ट स्टडी में मदद करेगा और ग्रहण से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराएगा. भारत का आदित्य- L1 सेटेलाइट भारत के मिशन सोलर साइंस के लिए भविष्य में बहुत ही उपयोगी होगा.

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साल 2026 में पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने वाला है. 17 फरवरी दिन मंगलवार को लग रहा यह ग्रहण काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. इस ग्रहण में आदित्य- L1 सेटेलाइट धमाल मचाएगा. ISRO का यह आदित्य L-1 ग्रहण की स्पष्ट स्टडी में मदद करेगा.

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यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से भी खास होगा. इस ग्रहण पर चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा और सूर्य का बाहरी भाग दिखेगा. ऐसे में जिन जगहों से ग्रहण पूरी तरह दिखेगा वहां सूर्य चमकदार अंगूठी के रूप में दिखाई देगा. इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है.

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ग्रहण का समय भारत के अनुसार, दोपहर को 3 बजकर 26 मिनट से शाम को 7 बजकर 57 मिनट के आसपास माना जा रहा है. यह ग्रहण 4 घंटे 32 मिनट लंबा होगा. यह ग्रहण पृथ्वी के कई हिस्सों पर आंशिक रूप से दिखाई देगा.

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यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा इस ग्रहण की दृश्यता अंटार्कटिका क्षेत्र में रहेगी. इसके साथ ही सूर्य ग्रहण को दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों से देख सकेंगे.

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बता दें कि, ISRO का आदित्य-L1 जिसे लैग्रेंज पॉइंट 1 भी कहते हैं मिशन सूर्य की स्टडी के लिए खास जगह पर स्थित है. 17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका के बर्फीले मैदानों में दिखेगा. बादल छाए रहने से इसे देखना थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन ISRO का आदित्य-L1 इसे आसान करेगा और इसकी मदद से ग्रहण की स्पष्ट स्टडी में मदद करेगा. (All Photo Credit - Social Media)