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Kainchi aur Ladaai: यह बात अक्सर बुजुर्ग कहते हैं- ‘खाली कैंची चलाने’ से घर में झगड़े होते हैं.' ज्योतिष, वास्तु और तर्क तीनों इस मान्यता पर अलग-अलग राय रखते हैं. आइए जानते हैं, यह मिथक है या सच्चाई?
खाली कैंची चलाना सही या गलत

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Kainchi aur Ladaai: आपने बुजुर्गों से जरूर सुना होगा- 'खाली कैंची मत चलाओ, घर में झगड़े होते हैं.' कई घरों में तो कैंची हाथ में लेते ही चेतावनी मिल जाती है. लेकिन क्या यह सच है या महज एक अंधविश्वास? ज्योतिष, वास्तु और आम समझ, तीनों ही इस पर अलग-अलग राय रखते हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे की असली कहानी क्या है?
राहु की मार है खाली कैंची

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हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, धारदार वस्तुएं राहु ग्रह से जुड़ी होती हैं. खाली कैंची (बिना कागज या कपड़ा काटे) चलाने से राहु की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है. इसका सीधा असर घर के माहौल पर पड़ता है. बेवजह की बहसें शुरू हो जाती हैं, छोटी-छोटी बातों पर खटपट बढ़ती है. यहां तक कि रिश्तों में दरार आने की आशंका भी जताई जाती है. यही कारण है कि बुजुर्ग खाली कैंची चलाने से सख्त मना करते हैं.
वास्तु भी कहता है: न करें यह गलती

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वास्तु शास्त्र के अनुसार, कैंची को हमेशा बंद करके और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. इसे खुले में नहीं छोड़ना चाहिए और न ही बिना काम के हवा में चलाना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी कलह बढ़ती है. खासकर रसोई और बेडरूम में खाली कैंची चलाना तो और भी अशुभ माना जाता है.
ये है असली सच्चाई

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अब सवाल यह है कि क्या वाकई खाली कैंची चलाने से झगड़े होते हैं? विज्ञान और व्यावहारिक दृष्टि से देखें तो यह मान्यता सुरक्षा के लिए बनाई गई थी. पुराने समय में घरों में तेज धार वाली कैंची होती थी. छोटे बच्चों को खाली कैंची चलाने की आदत पड़ जाती, तो कभी उंगली कट सकती थी, कभी कोई दूसरा घायल हो सकता था. इसलिए बड़ों ने एक मिथक गढ़ा – "खाली कैंची चलाने से झगड़े होते हैं." बच्चे डर से कैंची हाथ नहीं लगाते थे. इसी तरह, जंग लगी या टूटी कैंची से भी चोट लगने का खतरा रहता था, इसलिए उसे रखने से मना किया गया.
रखें इसका भी ध्यान

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दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ कैंची ही नहीं, बल्कि तेज चाकू, सूआ, कैंची की तरह की दूसरी नुकीली चीजों को भी खाली चलाने की मनाही है. पुरानी पीढ़ी कहती है कि इनसे तर्क-वितर्क बढ़ते हैं. वहीं, यदि आपको लगता है कि घर में वाकई लगातार झगड़े हो रहे हैं, तो कैंची के साथ-साथ अपने व्यवहार और संवाद पर भी गौर करें. असली तूफान तो अक्सर जुबान से शुरू होता है, कैंची से नहीं.