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Garuda Purana: चिता को मुखाग्नि देने का अधिकार बेटे का बताया गया है लेकिन कई स्थितियों में यह जिम्मेदारी निभाने के अधिकार के बारे में बताया गया है. चलिए इसके बारे में जानते हैं.
अंतिम संस्कार का महत्व

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हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार को 16 संस्कारों में से एक माना गया है. व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार सही नियमों के साथ किया जाए तो आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. अंतिम संस्कार में गलतियों के कारण आत्मा को कष्ट होते हैं.
किसे होता है मुखाग्नि देने का अधिकार?

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मृत व्यक्ति को मुखाग्नि देने के लिए कई नियमों के बारे में बताया गया है. मुखाग्नि देने का अधिकार बेटे का बताया गया है लेकिन इसको लेकर कठोर नियम नहीं हैं. बेटे के न होने या अन्य परिस्थितियों में इस जिम्मेदारी को कोई और पूरा कर सकता है.
कौन कर सकता है अंतिम संस्कार?

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मृतक का कोई पुत्र नहीं होता है तो ऐसे में बेटी या पत्नी उसे मुखाग्नि दे सकती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, बेटी और पत्नी को चिता को अग्नि देने और श्राद्ध करने का अधिकार होता है. कहीं पर भी बेटी के अंतिम संस्कार न करने के बारे में नहीं बताया गया है.
शिष्य और मित्र दे कर सकते हैं अंतिम संस्कार

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अगर किसी व्यक्ति के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं है तो इस स्थिति में उसका कोई बेहद करीबी अंतिम संस्कार कर सकता है. वह व्यक्ति अंतिम संस्कार करने के साथ ही श्राद्ध के नियमों को भी कर सकता है.
पिंडदान और तर्पण है जरूरी

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गरुड़ पुराण में अंतिम संस्कार के साथ ही पिंडदान और तर्पण के महत्व के बारे में बताया गया है. पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करना आत्मा की शांति के लिए बहुत ही जरूरी होता है. (All Photo Credit- Social Media) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.