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Badrinath Yatra: चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और आज से बदरीनाथ धाम के कपाट भी खुल चुके हैं। क्या आप जानते हैं, यहां की वादियों में शंख बजाना मना है। आइए जानते हैं, बदरीनाथ धाम में शंख बजाना क्यों वर्जित है?
चारधाम यात्रा विधिवत शुरू

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Badrinath Yatra: चारधाम यात्रा विधिवत शुरू हो चुकी है। केदारनाथ के बाद अब बदरीनाथ धाम के कपाट भी खुल गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि न केवल बदरीनाथ धाम बल्कि इसकी वादियों में शंख बजाना सख्त मना है? धार्मिक मान्यता से लेकर विज्ञान तक, इसके पीछे छिपी है एक रहस्यमयी और दिलचस्प वजह। आइए आपको बताते हैं इसे विस्तार से।
मां लक्ष्मी से जुड़ी है पौराणिक कथा

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पुराणों के अनुसार, जब मां लक्ष्मी बदरीनाथ में घोर तपस्या कर रही थीं, तभी भगवान विष्णु ने वहां एक राक्षस का वध किया। हर जीत के बाद शंख बजाने की परंपरा है, लेकिन विष्णु जी ने ऐसा नहीं किया। उन्हें डर था कि शंख की तेज आवाज से मां लक्ष्मी की तपस्या भंग न हो जाए। तभी से यह नियम बन गया कि इस पवित्र धाम में शंख कभी नहीं बजेगा। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है।
पहाड़ों के लिए खतरनाक है शंख

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लेकिन यहां सिर्फ धर्म ही नहीं, विज्ञान भी पीछे खड़ा है। बदरीनाथ हिमालय की गोद में बसा है। यहां सर्दियों में बर्फ की मोटी परत जम जाती है। शंख की तेज ध्वनि जब पहाड़ों से टकराती है, तो कंपन पैदा होती है। यह कंपन नाजुक बर्फ की परत में दरार ला सकती है। इससे हिमस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोग सदियों से इस बात को समझते आए हैं। इसलिए शंख बजाना यहां खतरे को न्योता देने जैसा है।
बिना शंख भी उतनी ही गहरी भक्ति

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भले ही यहां शंख न बजता हो, लेकिन पूजा-पाठ में कोई कमी नहीं है। हर प्रहर की आरती धूमधाम से होती है। मंत्रोच्चार की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। श्रद्धालु बिना शंख के ही अपनी आस्था डुबो देते हैं। यहां का शांत वातावरण अलग ही सुकून देता है। बिना किसी शोर के, सिर्फ मंत्रों और घंटियों की आवाज में भक्ति की गहराई और बढ़ जाती है।
प्रकृति का सम्मान सबसे बड़ा धर्म

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बदरीनाथ धाम हमें एक सीख देता है। धर्म और प्रकृति साथ-साथ चलते हैं। जहां एक तरफ मां लक्ष्मी की तपस्या का सम्मान है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों और बर्फ की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। शंख न बजाने का यह नियम हजारों साल पुरानी समझदारी को दिखाता है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु को यह नियम मानना ही पड़ता है। यही बदरीनाथ की अनोखी और रहस्यमयी पहचान है।
नियम तोड़ने पर क्या होता है?

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पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जिसने भी यहां जानबूझकर शंख बजाया, उसे कठिन परिणाम भुगतने पड़े। कुछ कथाओं में बताया गया है कि ऐसे लोगों की यात्रा बीच में ही रुक गई या उन्हें मानसिक कष्ट सहना पड़ा। हालांकि यह सिर्फ मान्यताएं हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं। आज भी कोई भी पुजारी या श्रद्धालु यहां शंख बजाने की हिम्मत नहीं करता।