
1 / 5
what is mega el nino: दुनिया इस वक्त प्रकृति के एक ऐसे खतरनाक रूप का सामना करने की दहलीज पर खड़ी है, जो पिछले 150 सालों में नहीं देखा गया. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 'मेगा अल नीनो' की वापसी हो रही है, जो न केवल मौसम का मिजाज बिगाड़ेगा बल्कि इंसानियत के लिए बड़ी तबाही का संकेत भी दे सकता है.
क्या है मेगा अल नीनो और यह क्यों है खतरनाक?

2 / 5
सरल भाषा में समझें तो 'अल नीनो' समुद्र के तापमान में होने वाले बदलाव की एक प्रक्रिया है. जब प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. लेकिन इस बार वैज्ञानिक इसे 'मेगा' कह रहे हैं, क्योंकि 1870 के दशक के बाद यानी लगभग 150 साल बाद ऐसी स्थिति बन रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग ने इसे और भी ज्यादा घातक बना दिया है.
इंसानी जीवन पर क्या होगा असर?

3 / 5
मेगा अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ सकती है. इसकी वजह से खेती पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जिससे अनाज की कमी और महंगाई बढ़ सकती है.
बीमारियों का खतरा, समुद्री जीवन को नुकसान

4 / 5
बढ़ता तापमान हैजा और डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करता है. इसके अलावा समुद्र का तापमान बढ़ने से मछलियां और अन्य जीव मरने लगते हैं, जिससे इकोसिस्टम बिगड़ जाता है.
भारत के लिए चिंता की बात

5 / 5
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए मेगा अल नीनो किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले कुछ साल मानवता के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हो सकते हैं.