नींद का पैटर्न पहले ही इस दिमागी समस्या के लिए कर देता है अलर्ट, क्या आपने नोटिस किया ये लक्षण?

दिमाग रात में भी एक्टिव रहता है, यहां तक की सोते समय भी. यह दिमाग में भरी बेकार की चीजों को साफ करता है, अच्छी यादें बनाता है, और अगले दिन के लिए तैयार होता है.

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साइंटिस्ट्स कर रहे इस एक्टिविटी की स्टडी

साइंटिस्ट्स कर रहे इस एक्टिविटी की स्टडी2 / 5

साइंटिस्ट अब दिमाग की उम्र बढ़ने को समझने के लिए इस एक्टिविटी की स्टडी कर रहे हैं. एक नई स्टडी से पता चलता है कि नींद के दौरान दिमाग की तरंगें डिमेंशिया के खतरे के शुरुआती लक्षण दिखा सकती हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को और बेथ इजरायल डीकोनेस मेडिकल सेंटर के रिसर्चर्स ने मेमोरी टेस्ट के बजाय नींद के डेटा का इस्तेमाल किया.

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छिपे हुए बदलाव दिमाग की उम्र पर असर डालते हैं?

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रिसर्च करने वालों ने "दिमाग की उम्र" नाम की एक चीज पर ध्यान दिया. यह नंबर दिखाता है कि दिमाग अपनी एक्टिविटी के आधार पर कितना पुराना बर्ताव करता है और यह हमेशा असली उम्र से मेल नहीं खाता. इसे मापने के लिए, टीम ने "ब्रेन एज इंडेक्स" का इस्तेमाल किया. यह इंडेक्स दिमाग की उम्र की तुलना असली उम्र से करता है. जब दिमाग की उम्र ज्यादा होती है, तो इसका मतलब है कि दिमाग तेजी से बूढ़ा हो रहा है. जब दिमाग की उम्र कम होती है, तो इसका मतलब है कि दिमाग की सेहत बेहतर है. यह कॉन्सेप्ट उन बदलावों को सामने लाने में मदद करता है जो रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई नहीं देते. कोई इंसान खुद को नॉर्मल महसूस कर सकता है, लेकिन दिमाग में पहले से ही कमजोरी के शुरुआती लक्षण दिखाई दे सकते हैं. दिमाग की उम्र उन छिपे हुए बदलावों को सामने लाने में मदद करती है.

दिमाग की बढ़ी है उम्र तो है ज्यादा खतरा

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इस स्टडी में 7,000 से ज्यादा लोग शामिल थे, जो जाने-माने रिसर्च ग्रुप्स जैसे कि फ्रेमिंगहम हार्ट स्टडी और मल्टी-एथनिक स्टडी ऑफ एथेरोस्क्लेरोसिस से थे. शुरुआत में, किसी भी प्रतिभागी को डिमेंशिया नहीं था. रिसर्चर्स ने इन लोगों पर कई सालों तक नजर रखी. उस दौरान, 1,000 से ज्यादा लोगों को डिमेंशिया हो गया. इससे टीम को नींद के शुरुआती पैटर्न की तुलना बाद के स्वास्थ्य परिणामों से करने का मौका मिला. नतीजों में एक साफ पैटर्न दिखा. जब दिमाग की उम्र असल उम्र से ज्यादा थी, तो डिमेंशिया का खतरा बढ़ गया. दिमाग की उम्र में हर 10 साल की बढ़ोतरी के साथ, खतरा लगभग 40 प्रतिशत बढ़ गया. जब दिमाग की उम्र कम रही, तो खतरा भी कम रहा. यह खोज दिखाती है कि दिमाग की उम्र एक शुरुआती संकेत की तरह काम करती है, जो गंभीर समस्याएं शुरू होने से पहले ही चेतावनी दे देती है.

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नींद से बेहतर जवाब क्यों मिलते हैं?

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नींद पर होने वाली ज्यादातर स्टडीज नींद की अवधि जैसे आसान पैमानों पर ही फोकस करती हैं. लेकिन इस स्टडी ने और गहराई से पड़ताल की और नींद के दौरान दिमाग की तरंगों पर ध्यान दिया. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को की डॉ. यू लेंग ने कहा, 'नींद से जुड़े आम पैमाने, नींद की शारीरिक बनावट की जटिल और बहुआयामी प्रकृति को पूरी तरह से नहीं दर्शा पाते.' आसान पैमानों से कई जरूरी बातें छूट जाती हैं. नींद के दौरान दिमाग कई छोटे-छोटे संकेत पैदा करता है, और हर संकेत यह बताता है कि दिमाग के अलग-अलग हिस्से किस तरह काम कर रहे हैं. इन संकेतों का अध्ययन करके, शोधकर्ताओं को इस बात की ज्यादा साफ तस्वीर मिलती है कि समय के साथ दिमाग किस तरह बूढ़ा होता है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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