
1 / 6
दिल्ली-पानीपत-करनाल रैपिड रेल कॉरिडोर को हरियाणा सरकार ने मंजूरी दे दी है. RRTS 136 किलोमीटर लंबा होगा. इस परियोजना की लागत करीब 33051 करोड़ रुपये है, जिसमें से हरियाणा सरकार का हिस्सा 7472 करोड़ रुपये है. एक तिहाई खर्च राज्य वहन करेगा. नमो भारत ट्रेन के इस रूट को कुछ और इलाकों कुरुक्षेत्र, साहा और पंचकूला तक ले जाने का प्लान बनाया है. इसके लिए आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय और नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन यानी एनसीआरटीसी को प्रस्ताव भेजा जाएगा. अगर पंचकूला तक ये रैपिड रेल जाएगी तो चंडीगढ़ भी दूर नहीं है, क्योंकि दोनों शहरों की दूरी 11 किलोमीटर की है. इससे चंडीगढ़ के लोग भी आसानी से रैपिड रेल का आनंद उठा पाएंगे.
केंद्रीय कैबिनेट के पास जाएगी अब फाइल

2 / 6
हरियाणा कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब फाइल अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट के पास जाएगी. भूमि अधिग्रहण और प्री-कंस्ट्रक्शन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है. फिलहाल ये नमो भारत कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर करनाल तक जाएगा. इस रैपिड रेल प्रोजेक्ट में हरियाणा में 11 स्टेशन होंगे.
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत रूट

3 / 6
अभी दिल्ली से करनाल जाने में 3-4 घंटे लगते हैं, लेकिन नमो भारत से यह दूरी बेहद 90-100 मिनट में तय होगी. दिल्ली में सराय काले खां (इंटरचेंज) के साथ कश्मीरी गेट, बुराड़ी जैसे नमो भारत स्टेशन प्रस्तावित हैं. जबकि हरियाणा में कुंडली, मुरथल, सोनीपत, गन्नौर, समालखा, पानीपत (सेक्टर-18), घरौंडा और करनाल (ISBT) में रैपिड रेल स्टेशन बनाया जाएगा.
रैपिड रेल कॉरिडोर के निकट ऊंची इमारतें

4 / 6
रैपिड रेल की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है और ऑपरेशनल स्पीड 160 किमी प्रति घंटा. औसत गति स्टेशनों पर ठहराव समेत करीब 100 किमी प्रति घंटा है. इसमें पूरी तरह एसी कोच, वाई-फाई, बिजनेस क्लास और महिलाओं के लिए आरक्षित कोच हैं. इसे TOD पॉलिसी के तहत बनाया जाएगा. यानी स्टेशनों के आसपास ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के तहत ऊंची इमारतों की अनुमति दी जाएगी ताकि अतिरिक्त कमाई हो सके.
सराय काले खां स्टेशन सबसे बड़ा इंटरचेंज

5 / 6
दिल्ली का सराय काले खां स्टेशन सबसे बड़ा इंटरचेंज बनेगा, जहां से यात्री मेरठ और अलवर (RRTS), मेट्रो, ISBT और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के बीच आसानी से बदल सकेंगे. हाईवे (NH-44) पर कारों का दबाव कम होगा, जिससे प्रदूषण भी घटेगा.सोनीपत, पानीपत और करनाल जैसे शहर दिल्ली के साथ सीधे जुड़कर इकोनॉमिक हब के तौर पर तैयार होंगे.
पूरे उत्तर भारत के लिए होगा एक गेम चेंजर

6 / 6
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत (RRTS) ट्रेन कॉरिडोर को हरियाणा, दिल्ली एनसीआर ही नहीं, पूरे उत्तर भारत के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है. कैबिनेट ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रशासनिक सचिव को परियोजना का नोडल अधिकारी बनाया है. उन्हें एनसीआरटीसी के साथ समझौतों और संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी दी है.