Census 2026: 30 लाख कर्मचारी, 140 करोड़ लोग और 33 सवाल! जानें कैसी होगी भारत की पहली डिजिटल जनगणना
140 करोड़ भारतीयों की गिनती शुरू। जी हां, जनगणना 2026 (Census 2026) सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि भारत की बदलती तस्वीर है। पहली बार डिजिटल ऐप से गिनती होगी और 100 साल बाद इसमें जाति शामिल होगी। क्या आप तैयार हैं अपने घर आने वाले गणनाकर्मी के 33 सवालों के जवाब देने के लिए? पूरी जानकारी यहां देखें

140 करोड़ भारतीयों की गिनती शुरू, दुनिया के सबसे बड़े महा-सर्वे का आगाज
2 / 11भारत ने अपनी पूरी आबादी को गिनने का विशाल अभ्यास शुरू कर दिया है। लगभग 1.4 अरब लोगों की इस गिनती में न केवल सिर गिने जाएंगे, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन की हर छोटी-बड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। 16 साल के लंबे इंतजार के बाद हो रही यह जनगणना भारत का भविष्य तय करेगी।
16 साल का लंबा इंतजार: क्यों हुई इस बार इतनी देरी?
3 / 11नियम के मुताबिक भारत में हर 10 साल में जनगणना होनी चाहिए। आखिरी बार यह 2011 में हुई थी। 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी और अन्य प्रशासनिक बाधाओं के कारण टलती गई। अब 16 साल बाद भारत यह जानने की कोशिश कर रहा है कि पिछले डेढ़ दशक में हम कितना बदले हैं।
30 लाख कर्मियों की फौज: घर-घर पहुंचेगी सरकार
4 / 11इस मम्मथ एक्सरसाइज को पूरा करने के लिए 30 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों (ज्यादातर स्कूल शिक्षक) की ड्यूटी लगाई गई है। ये लोग महानगरों की ऊंची इमारतों से लेकर सुदूर जंगलों और गांवों तक, हर एक घर का दरवाजा खटखटाएंगे ताकि कोई भी छूट न जाए।
पहली बार डिजिटल जनगणना: पेन-कागज का दौर हुआ खत्म
5 / 11भारत के इतिहास में पहली बार, जनगणना का डेटा पूरी तरह डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। फील्ड वर्कर्स मोबाइल ऐप के जरिए सीधे डेटा सबमिट करेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों के विश्लेषण में भी अधिक सटीकता और तेजी आएगी।
दो चरणों में होगी गिनती: जानिए आपका नंबर कब आएगा?
6 / 11यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण (वर्तमान) में घरों की स्थिति, वहां मौजूद सुविधाओं और संपत्तियों (Assets) का विवरण लिया जा रहा है। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या, शिक्षा, आय, प्रवास (Migration) और प्रजनन क्षमता से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे।
100 साल बाद जाति की एंट्री: एक विवादास्पद फैसला
7 / 11इस जनगणना की सबसे बड़ी और चर्चित बात है—जाति की गिनती। 1931 के बाद पहली बार भारत में जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे पिछड़े वर्गों के लिए बेहतर योजनाएं बनेंगी, जबकि आलोचकों का डर है कि इससे सामाजिक विभाजन और गहरा हो सकता है।
सवालों की झड़ी: पहले चरण में ही पूछे जाएंगे 33 सवाल
8 / 111872 में जब अंग्रेजों ने पहली बार जनगणना की थी, तब सिर्फ 17 सवाल पूछे गए थे। इस बार पहले चरण में ही आपसे 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें आपके घर की छत किस चीज से बनी है से लेकर आपके पास स्मार्टफोन, इंटरनेट, गाड़ी या टीवी है या नहीं—सब कुछ शामिल होगा।
डेमोग्राफिक डिविडेंड: युवाओं का देश है भारत
9 / 11जनगणना के आंकड़ों से भारत की युवा शक्ति की असली तस्वीर साफ होगी। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत की 40% आबादी 25 साल से कम उम्र की है और औसत आयु मात्र 28 वर्ष है। यह चीन (औसत उम्र 38) के मुकाबले भारत को एक बड़ी आर्थिक बढ़त (Demographic Dividend) दिला सकता है।
गरीबी और समृद्धि का सटीक पैमाना
10 / 11भारत आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (3.5 ट्रिलियन डॉलर) है, लेकिन अमीरी और गरीबी के बीच एक बड़ी खाई है। यह जनगणना सरकार को यह समझने में मदद करेगी कि किन क्षेत्रों में अभी भी साफ पानी, पक्के मकान और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
कब आएंगे नतीजे? 2027 तक करना होगा इंतजार
11 / 116,40,000 गांवों और 10,000 कस्बों को कवर करने वाला यह अभियान अगले साल तक जारी रहेगा। पूरी आबादी का सटीक आंकड़ा और रिपोर्ट 2027 के अंत तक आने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट अगले 10 सालों के लिए भारत की विकास योजनाओं का आधार बनेगी।
