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भारत के लिए 2026 एक ऐतिहासिक वर्ष होने जा रहा है क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने अपनी 1.4 अरब (140 करोड़) आबादी को गिनने का महाअभियान शुरू कर दिया है। कोरोना महामारी और प्रशासनिक कारणों से हुई देरी के बाद, यह जनगणना कई मायनों में डिजिटल और खास होने वाली है।
140 करोड़ भारतीयों की गिनती शुरू, दुनिया के सबसे बड़े महा-सर्वे का आगाज

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भारत ने अपनी पूरी आबादी को गिनने का विशाल अभ्यास शुरू कर दिया है। लगभग 1.4 अरब लोगों की इस गिनती में न केवल सिर गिने जाएंगे, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन की हर छोटी-बड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। 16 साल के लंबे इंतजार के बाद हो रही यह जनगणना भारत का भविष्य तय करेगी।
16 साल का लंबा इंतजार: क्यों हुई इस बार इतनी देरी?

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नियम के मुताबिक भारत में हर 10 साल में जनगणना होनी चाहिए। आखिरी बार यह 2011 में हुई थी। 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी और अन्य प्रशासनिक बाधाओं के कारण टलती गई। अब 16 साल बाद भारत यह जानने की कोशिश कर रहा है कि पिछले डेढ़ दशक में हम कितना बदले हैं।
30 लाख कर्मियों की फौज: घर-घर पहुंचेगी सरकार

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इस मम्मथ एक्सरसाइज को पूरा करने के लिए 30 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों (ज्यादातर स्कूल शिक्षक) की ड्यूटी लगाई गई है। ये लोग महानगरों की ऊंची इमारतों से लेकर सुदूर जंगलों और गांवों तक, हर एक घर का दरवाजा खटखटाएंगे ताकि कोई भी छूट न जाए।
पहली बार डिजिटल जनगणना: पेन-कागज का दौर हुआ खत्म

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भारत के इतिहास में पहली बार, जनगणना का डेटा पूरी तरह डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। फील्ड वर्कर्स मोबाइल ऐप के जरिए सीधे डेटा सबमिट करेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों के विश्लेषण में भी अधिक सटीकता और तेजी आएगी।
दो चरणों में होगी गिनती: जानिए आपका नंबर कब आएगा?

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यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले चरण (वर्तमान) में घरों की स्थिति, वहां मौजूद सुविधाओं और संपत्तियों (Assets) का विवरण लिया जा रहा है। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या, शिक्षा, आय, प्रवास (Migration) और प्रजनन क्षमता से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे।
100 साल बाद जाति की एंट्री: एक विवादास्पद फैसला

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इस जनगणना की सबसे बड़ी और चर्चित बात है—जाति की गिनती। 1931 के बाद पहली बार भारत में जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे पिछड़े वर्गों के लिए बेहतर योजनाएं बनेंगी, जबकि आलोचकों का डर है कि इससे सामाजिक विभाजन और गहरा हो सकता है।
सवालों की झड़ी: पहले चरण में ही पूछे जाएंगे 33 सवाल

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1872 में जब अंग्रेजों ने पहली बार जनगणना की थी, तब सिर्फ 17 सवाल पूछे गए थे। इस बार पहले चरण में ही आपसे 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें आपके घर की छत किस चीज से बनी है से लेकर आपके पास स्मार्टफोन, इंटरनेट, गाड़ी या टीवी है या नहीं—सब कुछ शामिल होगा।
डेमोग्राफिक डिविडेंड: युवाओं का देश है भारत

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जनगणना के आंकड़ों से भारत की युवा शक्ति की असली तस्वीर साफ होगी। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत की 40% आबादी 25 साल से कम उम्र की है और औसत आयु मात्र 28 वर्ष है। यह चीन (औसत उम्र 38) के मुकाबले भारत को एक बड़ी आर्थिक बढ़त (Demographic Dividend) दिला सकता है।
गरीबी और समृद्धि का सटीक पैमाना

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भारत आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (3.5 ट्रिलियन डॉलर) है, लेकिन अमीरी और गरीबी के बीच एक बड़ी खाई है। यह जनगणना सरकार को यह समझने में मदद करेगी कि किन क्षेत्रों में अभी भी साफ पानी, पक्के मकान और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
कब आएंगे नतीजे? 2027 तक करना होगा इंतजार

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6,40,000 गांवों और 10,000 कस्बों को कवर करने वाला यह अभियान अगले साल तक जारी रहेगा। पूरी आबादी का सटीक आंकड़ा और रिपोर्ट 2027 के अंत तक आने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट अगले 10 सालों के लिए भारत की विकास योजनाओं का आधार बनेगी।