गुस्से के दौरान अचानक आंसू छलक आना कई महिलाओं के लिए आम होता है, लेकिन इसकी वजह को सिर्फ हार्मोन बता देना ठीक नहीं. सच्चाई इससे कहीं ज्यादा शॉकिंग है, जो शायद आपको भी नहीं पता होगी. मनोवैज्ञानिकों और डॉक्टरों की मानें तो महिलाओं का गुस्से में रोना सिर्फ हार्मोन की वजह से नहीं होता. आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह.
गुस्से में क्यों रोती हैं महिलाएं?

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका शर्मा ने बताया कि जब कोई महिला गुस्से में होती है तो अक्सर उसके अंदर कई भावनाएं एक साथ उमड़ती हैं. असहायता, आहत होना, न सुना जाना और निराशा जैसे भाव मस्तिष्क पर भारी पड़ जाते हैं. रोना इस भावनात्मक ओवरलोड को प्रोसेस करने का मस्तिष्क का प्राकृतिक तरीका है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है.
बचपन से मिली ट्रेनिंग का नतीजा

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महिलाओं को बचपन से ही सिखाया जाता है कि अपनी भावनाओं को रोकर व्यक्त करें, जबकि पुरुषों को आंसू रोकने की सलाह दी जाती है. यह सामाजिक कंडीशनिंग वयस्क होने पर भी जारी रहती है. नतीजतन गुस्से की स्थिति में महिलाओं के आंसू ज्यादा आसानी से निकल आते हैं, जो कमजोरी की निशानी नहीं, बल्कि बचपन की दिमाग में बैठी उस सीख का नतीजा है.
तनाव और भावनात्मक थकान का भी योगदान

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जब कोई महिला पहले से तनावग्रस्त, नींद की कमी या भावनात्मक रूप से थकी हुई होती है, तो छोटी-सी बात पर भी आंसू आ जाते हैं. इस स्थिति में भावनात्मक सीमा कम हो जाती है. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे में रोना नर्वस सिस्टम को शांत करने का प्राकृतिक तरीका बन जाता है.
हार्मोन का कितना प्रभाव?

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हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और कोर्टिसोल मूड को प्रभावित जरूर करते हैं, खासकर पीरियड्स से पहले. एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा के अनुसार, यह केवल एक हिस्सा है. गुस्से में रोने का मुख्य कारण भावनात्मक प्रोसेसिंग और तनाव प्रतिक्रिया है, न कि सिर्फ हार्मोन की वजह से ऐसा होता है.
गुस्से को दबाने की आदत

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महिलाएं अक्सर गुस्से को अंदर ही अंदर दबाती हैं, जिसके कारण फ्रस्ट्रेशन बढ़ता जाता है. जब यह दबाव ज्यादा हो जाता है तो आंसुओं के रूप में बाहर निकलता है. गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. ईशा नंदल कहती हैं कि यह नर्वस सिस्टम की ऊर्जा रिलीज करने की प्रक्रिया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर है.
क्या बार-बार रोना है टेंशन की बात?

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कभी-कभी गुस्से में रोना सामान्य है, लेकिन अगर यह बहुत बार हो रहा हो, तो पीएमएस, पीएमडीडी, थायरॉइड या क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.