स्टडी में पता चला वजन घटाने का सबसे आसान तरीका, रोजाना करना है बस एक ही काम

मोटापे से परेशान लोग अक्सर अपने वजन को लेकर चिंतित रहते हैं. कुछ तो पतले होने के लिए जिम जॉइन करते हैं अच्छा खासा पैसा खर्च करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बहुत अच्छा परिणाम नहीं मिलता. अगर आप भी मोटापे से परेशान हैं तो हाल ही में हुए एक स्टडी आपकी ये चिंता दूर कर सकती है. ओरेगन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 112 अधिक वजन वाले वयस्कों पर 12 हफ्ते का अध्ययन किया और चौंकाने वाले नतीजे सामने आए.

Motapa
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मोटापे से परेशान लोग अक्सर अपने वजन को लेकर चिंतित रहते हैं. कुछ तो पतले होने के लिए जिम जॉइन करते हैं अच्छा खासा पैसा खर्च करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बहुत अच्छा परिणाम नहीं मिलता. अगर आप भी मोटापे से परेशान हैं तो हाल ही में हुए एक स्टडी आपकी ये चिंता दूर कर सकती है. ओरेगन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने 112 अधिक वजन वाले वयस्कों पर 12 हफ्ते का अध्ययन किया और चौंकाने वाले नतीजे सामने आए.

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रोजाना करें एक ही काम

रोजाना करें एक ही काम2 / 9

जिन प्रतिभागियों ने रोज लगभग वही भोजन और उसी सीमा की कैलोरी खाई, उन्होंने औसतन अपने वजन का 5.9 प्रतिशत घटाया. जिनका खाना अधिक विविध था और कैलोरी में बड़ा उतार‑चढ़ाव था, उन्होंने केवल 4.3 प्रतिशत वजन घटाया. इससे साफ होता है कि टाइमिंग और भोजन की संरचना में दोहराव वजन घटाने की दर बढ़ा सकता है.

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क्यों कम नहीं होता वजन?

क्यों कम नहीं होता वजन?3 / 9

शोध में पाया गया कि जितना अधिक दिन‑प्रतिदिन की कैलोरी बदलती है, वजन घटने का असर उतना ही कम होता है. हर 100 कैलोरी की दैनिक अस्थिरता पर औसतन लगभग 0.6 प्रतिशत वजन घटाने की दर कम पाई गई. इससे यह जाहिर होता है कि 'आज बहुत, कल बिल्कुल कम' खाने की आदत डाइटिंग के लक्ष्य को धीमा कर देती है.

आदत बन जाता है एक ही तरह का खाना

आदत बन जाता है एक ही तरह का खाना4 / 9

शोध के मुख्य लेखक चार्लोट हैगरमैन कहती हैं कि आज के वातावरण में स्वस्थ आहार के लिए लगातार आत्म‑नियंत्रण चाहिए, जबकि नियमित भोजन टाल‑मटोल कम करता है. जब हर दिन लगभग वही भोजन होता है, तो खाने का फैसला हर बार नए सिरे से नहीं लेना पड़ता. इससे स्वस्थ चुनाव आदत बन जाते हैं और डाइटिंग का दिमागी दबाव भी कम होता है.

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साधारण भोजन रोटेशन बनाना आसान

साधारण भोजन रोटेशन बनाना आसान5 / 9

शोधकर्ता सुझाव देते हैं कि लोग अपने लिए 3–4 नाश्ते, 2–3 दोपहर और 2–3 रात के भोजन 'सेट' बना सकते हैं और उन्हें रोटेशन में खाएं. इससे योजना बनाना आसान हो जाता है, कैलोरी कंट्रोल में रहती है और खाने के लिए रोज नए विकल्प ढूंढने की ज़रूरत नहीं पड़ती. इस तरह वजन घटना भी तेज होती है और थकान भी कम लगती है.

विविधता भी जरूरी

विविधता भी जरूरी6 / 9

विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि भोजन में विविधता जरूरी है, खासकर ताजे फल, सब्जियों और संतुलित अनाज–प्रोटीन में. लेकिन समस्या तब होती है जब विविधता का अर्थ बार‑बार नए हाई‑कैलोरी या अनियमित आइटम लेना हो जाए. इसलिए भोजन की रेंज अंदर ही रखें, जैसे अलग‑अलग सब्ज़ियां और दालें, लेकिन कुल कैलोरी और टाइम लगभग वही रहे.

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लंबे समय तक चलने वाली आदत

लंबे समय तक चलने वाली आदत7 / 9

शोध से पता चलता है कि वजन घटाने में आज‑कल बनाई जाने वाली जटिल डाइट‑योजनाओं से ज्यादा असर दिखाती है सरल और नियमित आहार अनुशासन. जब एक बार दिनचर्या में भोजन का नियम बन जाता है, तो लोग उसे हफ्तों और महीनों तक जारी रख पाते हैं. इससे न केवल वजन घटता है, बल्कि वापस बढ़ने का खतरा भी कम होता है.

मोटापे की वजह का ध्यान रखें

मोटापे की वजह का ध्यान रखें8 / 9

शोधकर्ता यह भी साफ करते हैं कि इस अध्ययन में केवल संबंध देखा गया है, कारण‑प्रभाव नहीं. संभव है कि जो लोग नियमित भोजन रखते हैं, वे आमतौर पर ज्यादा अनुशासित, जागरूक और लक्ष्य‑उन्मुख भी हों. इसलिए यह निष्कर्ष ज्यादा सही है कि नियमित खाना वजन घटाने में बहुत मददगार है, लेकिन अकेला जादूई उपाय नहीं है.

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छोटे‑छोटे नियम चुनें और अडिग रहें

छोटे‑छोटे नियम चुनें और अडिग रहें9 / 9

स्टडी के अंत में शोधकर्ता यह सुझाव देते हैं कि वजन घटाने के लिए डाइट इतनी कठोर न हो कि उसे जल्दी छोड़ देना पड़े. बल्कि छोटे, आसान और दोहराए जा सकने वाले नियम बनाएं, जैसे निश्चित समय पर भोजन, एक सीमित रेंज में मील चुनना और दिन‑भर की कैलोरी लगभग एक सीमा में रखना. इस तरह यह नियम आदत बन जाते हैं और वजन घटने के साथ‑साथ सेहत में भी सुधार दिखाई देता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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