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हमारे शरीर का कुदरती तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस होता है जिस पर सभी अंग सही ढंग से काम करते हैं. जब बाहर का तापमान बढ़ता है तो हमारा शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी में यह सिस्टम भी फेल हो जाता है.
कब शुरू होती है असली परेशानी?

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जैसे ही पारा 40 डिग्री के पार पहुंचता है तो इंसान का शरीर जवाब देने लगता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. इतनी तेज धूप में ज्यादा देर रुकने से चक्कर आना और थकान जैसे लक्षण दिखने लगते हैं क्योंकि शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता है.
हीट स्ट्रोक का खतरा कब होता है?

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जब बाहर का तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच जाए तो शरीर के अंदरूनी अंगों पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इस स्थिति को हीट स्ट्रोक कहा जाता है जहाँ शरीर का इंटरनल तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला जाता है और यह जानलेवा साबित हो सकता है.
क्या हैं हीट स्ट्रोक के मुख्य लक्षण?

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हीट स्ट्रोक होने पर तेज सिरदर्द, उल्टी आना और बहुत ज्यादा पसीना आने जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. कई बार इंसान बेहोश भी हो जाता है और अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति मौत का कारण भी बन सकती है इसलिए इसे हल्के में न लें.
कैसे करें खुद का बचाव?

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भीषण गर्मी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप बार-बार पानी पीते रहें ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे. दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलने से बचें और अगर निकलना जरूरी हो तो सिर को ढककर रखें और हमेशा ढीले और हल्के कपड़े ही पहनें.
कितनी गर्मी झेलना है मुमकिन?

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इंसानी शरीर 37 से 40 डिग्री तक की गर्मी को जैसे-तैसे बर्दाश्त कर लेता है पर इसके ऊपर जाते ही खतरा बढ़ने लगता है. डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सुझाव है और सेहत से जुड़ी किसी भी गंभीर समस्या के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.