खाते समय स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल कितना खतरनाक? आप सोच भी नहीं सकते इसका घातक परिणाम

खाने के दौरान स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल कितना घातक हो सकता है, इसे लेकर एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आज के समय में बच्चों से लेकर युवाओं और कई तो बुजुर्ग भी खाने के समय दूसरे हाथ में स्मार्टफोन रखते हैं और मुंह के साथ फोन में भी स्क्रोलिंग चलती रहती है. अगर आप भी ऐसी आदत से मजबूर हैं तो ये खबर आपके लिए ही है.

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खाने के दौरान स्मार्टफोन का अत्यधिक

खाने के दौरान स्मार्टफोन का अत्यधिक2 / 9

इस्तेमाल कितना घातक हो सकता है, इसे लेकर एक नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आज के समय में बच्चों से लेकर युवाओं और कई तो बुजुर्ग भी खाने के समय दूसरे हाथ में स्मार्टफोन रखते हैं और मुंह के साथ फोन में भी स्क्रोलिंग चलती रहती है. अगर आप भी ऐसी आदत से मजबूर हैं तो ये खबर आपके लिए ही है.

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खाने के समय फोन इस्तेमाल करने का खतरा

खाने के समय फोन इस्तेमाल करने का खतरा3 / 9

जब युवा खाते वक्त स्मार्टफोन पर चिपके रहते हैं, तो भावनात्मक रूप से ज्यादा खाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है. तनाव या उदासी में खाना खाना आम हो जाता है, जो बिना किसी आधिकारिक बीमारी के भी चेतावनी संकेत देता है. 'मेडिकल इंटरनेट रिसर्च' जर्नल की स्टडी बताती है कि फोन की बिना बेचैनी महसूस करना ही समस्या की जड़ है.

52,000 से ज्यादा युवाओं पर हुई स्टडी

52,000 से ज्यादा युवाओं पर हुई स्टडी4 / 9

35 स्टडीज और 52,000 से ज्यादा युवाओं (औसत उम्र 17 वर्ष) पर आधारित यह शोध वैश्विक समस्या को रेखांकित करता है. टीनएजर्स अपनी पहचान दूसरों से तुलना करके बनाते हैं, इसलिए सोशल मीडिया के आदर्श शरीर चित्र असंतोष पैदा करते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि सात घंटे से अधिक फोन का रोजाना इस्तेमाल से परिणाम घातक हो सकते हैं.

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खान-पान विकारों की समस्या

खान-पान विकारों की समस्या5 / 9

अत्यधिक फोन उपयोग और खाने के विकृत व्यवहार में सीधा लिंक पाया गया है. ओवरइटींग, अनियंत्रित खाना और भोजन की लत इसके प्रमुख उदाहरण हैं. युवा तनाव में खाकर अपनी भावनाओं को दबाने की कोशिश करते हैं, जो लंबे समय में गंभीर विकारों का रूप ले लेता है.

सात घंटे की डेड लाइन

सात घंटे की डेड लाइन6 / 9

दिन में सात घंटे से ज्यादा फोन चलाने वाले युवाओं में नकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं. यह थ्रेशोल्ड स्टडी में स्पष्ट रूप से उभरा, जहां सामान्य उपयोग से तुलना की गई. इससे बचाव के लिए समय सीमा तय करना जरूरी बताया गया है.

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शरीर का अचानक वजन बढ़ना

शरीर का अचानक वजन बढ़ना7 / 9

फोन पर लगातार आदर्श बॉडी इमेज देखने से युवा अपने शरीर से नाखुश हो जाते हैं. ऑनलाइन कंटेंट की वजह से नकारात्मक आत्मदृष्टि विकसित होती है. यह समस्या खासकर किशोरावस्था में पहचान निर्माण के दौरान गंभीर हो जाती है. ड्राइविंग या चलते समय फोन उपयोग हादसों की संभावना कई गुना बढ़ा देता है. सुरक्षा के लिहाज से यह लत जानलेवा साबित हो सकती है. जागरूकता अभियान और नियम इस समस्या को कम करने में सहायक हैं.

और भी होती हैं समस्याएं

और भी होती हैं समस्याएं8 / 9

सिर्फ स्क्रीन टाइम नहीं, बल्कि 'समस्या स्मार्टफोन उपयोग' (PSU) ही मुख्य खतरा है. इसमें फोन छीनने पर गुस्सा, बेचैनी या नियंत्रण की कमी शामिल है. दैनिक जीवन में परेशानी पैदा होने पर इसे मानसिक निर्भरता कहते हैं. काम या पढ़ाई के दौरान फोन की वजह से एकाग्रता भंग होती है. लगातार distractions लक्ष्यों को प्रभावित करते हैं. परिणामस्वरूप प्रदर्शन गिरता है और समय की बर्बादी बढ़ जाती है.

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मानसिक स्वास्थ्य पर असर

मानसिक स्वास्थ्य पर असर9 / 9

स्मार्टफोन की लत चिंता, अवसाद और एकाकीपन को बढ़ावा देती है. सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना नकारात्मक सेल्फ इमेज बनाती है. लंबे समय तक उपयोग नींद की कमी और मूड स्विंग्स का कारण बनता है. लंबे समय फोन देखने से आंखों पर जोर, नींद बाधित और बैठे रहने की आदत बढ़ती है. इससे मोटापा, मुद्रा संबंधी समस्याएं और शारीरिक कमजोरी आम हो जाती है. सक्रिय जीवनशैली अपनाना इस खतरे से बचाव का तरीका है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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