काशी क्यों कहलाता है साढ़े 3 हवेलियों का शहर? हैरान कर देगा इसके पीछे का रहस्य
काशी अपनी प्राचीन गलियों और अनसुने किस्सों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इन्ही गलियों में छिपा है साढे तीन हवेलियों का वह रोचक रहस्य, जो आज भी सबको हैरान कर देता है.

दुनिया के सबसे पुराने शहर काशी में ऊंची इमारतों और किलों के बीच साढ़े तीन हवेलियों की कहानी बेहद मशहूर है. यहाँ तीन हवेलियां तो पूरी हैं लेकिन एक हवेली के आधा होने के कारण इसे साढ़े तीन हवेलियों का शहर कहा जाता है.
कश्मीरी मल की क्या है कहानी?
2 / 6कश्मीरी मल की हवेली चौक क्षेत्र में स्थित है जो ब्रिटिश दौर में अंग्रेजों को भी कर्ज देने वाले बड़े व्यापारी थे. उन्होंने अपनी मां के अंतिम संस्कार के लिए जमीन पर सोने की अशर्फियां बिछा दी थीं जो आज भी चर्चा का विषय है.
देवकीनंदन की हवेली क्यों है खास?
3 / 6रामपुरा क्षेत्र में बनी बाबू देवकीनंदन की पांच मंजिला हवेली में कुल 48 कमरे हैं और यह प्रयागराज के एक बड़े कारोबारी की थी. कहा जाता है कि इंग्लैंड से लिफ्ट न पहुंच पाने के कारण वे इस हवेली का कामकाज छोड़कर वापस चले गए थे.
कंगन वाली हवेली का क्या है सच?
4 / 6राजा मान सिंह ने इस ऐतिहासिक हवेली का निर्माण महारानी के बेशकीमती कंगन को बेचकर कराया था इसलिए इसका नाम कंगन वाली हवेली पड़ा. करीब 500 साल पुरानी इस हवेली में 4 आंगन और 20 बरामदे हैं जो इसकी भव्यता को बयां करते हैं.
कौन सी है वो आधी हवेली?
5 / 6काशी की गलियों में बनी काठ की हवेली पूरी तरह लकड़ी से बनी है जिसमें ईंट या पत्थर का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं हुआ है. इसे ही लोग आधी हवेली मानते हैं क्योंकि यह पांच मंजिला इमारत अब काफी जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है.
क्या है हवेली का असली मतलब?
6 / 6हवेली का मतलब ऐसा विशाल और हवादार भवन होता है जहाँ आंगन और बरामदे जैसी सभी सुख सुविधाएं एक साथ मौजूद हों. काशी की ये ऐतिहासिक हवेलियां आज भी अपनी पुरानी चमक और कहानियों के साथ इस प्राचीन शहर का गौरव बढ़ा रही हैं.